मनीला,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में भड़के भीषण संघर्ष की आंच अब सात समंदर पार दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुंच गई है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे निपटने के लिए फिलीपींस ने मंगलवार को नेशनल एनर्जी इमरजेंसी घोषित कर दी है। मौजूदा वैश्विक संकट के बीच ऊर्जा आपातकाल लागू करने वाला फिलीपींस दुनिया का पहला देश बन गया है। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने स्पष्ट किया है कि यह कठोर कदम देश को संभावित अंधकार में डूबने से बचाने और जनता को बिजली की आसमान छूती कीमतों से राहत देने के लिए उठाया गया है। फिलीपींस अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस के आयात पर निर्भर है, लेकिन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही हैं। राष्ट्रपति मार्कोस द्वारा जारी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के मुताबिक, देश की ऊर्जा स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने अब बिजली उत्पादन बढ़ाने हेतु कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स पर अपनी निर्भरता बढ़ाने का निर्णय लिया है। फिलीपींस की ऊर्जा सचिव शेरोन गारिन ने संकेत दिए हैं कि यह इमरजेंसी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो सकती है। वर्तमान में फिलीपींस की 60 प्रतिशत बिजली का उत्पादन कोयले से होता है, जिसे अब और अधिक विस्तार दिया जाएगा ताकि मिडिल ईस्ट के संकट का सीधा असर आम आदमी के बिजली बिलों पर न पड़े। इस ऊर्जा संकट के बीच पड़ोसी देश इंडोनेशिया ने फिलीपींस की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। जब दुनिया भर में ईंधन के लिए हाहाकार मचा है, तब इंडोनेशिया ने मनीला को भरोसा दिलाया है कि वह कोयले के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा। इस आश्वासन के बाद फिलीपींस न केवल कोयले का आयात बढ़ाएगा, बल्कि अपनी स्थानीय कोयला खदानों से भी उत्पादन को अधिकतम स्तर पर ले जाने की योजना पर काम कर रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य किसी भी स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखना है। वीरेंद्र/ईएमएस/25मार्च2026 --------------------------------