बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने नाबालिग बच्चे की कस्टडी को लेकर दायर हैबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब बच्चा अवैध हिरासत में नहीं है, तब इस प्रकार की याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। क्या है मामला बालोद जिले के रहने वाले याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उनके नाबालिग पुत्र को 9 फरवरी 2026 को पारिवारिक विवाद के दौरान जबरन ले जाया गया। उन्होंने कोर्ट से बच्चे को पेश करने, कस्टडी वापस दिलाने और सुरक्षा प्रदान करने की मांग की थी। पुलिस और राज्य का पक्ष राज्य की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बच्चा किसी अवैध हिरासत में नहीं है, बल्कि अपनी मां के साथ ननिहाल में रह रहा है। पुलिस थाना बालोद के एसएचओ की रिपोर्ट और मां के बयान में भी यही बात सामने आई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बच्चे को जबरन नहीं रखा गया है। कोर्ट की अहम टिप्पणी कोर्ट ने कहा कि हैबियस कॉर्पस याचिका तभी लागू होती है जब किसी व्यक्ति को अवैध रूप से बंधक या हिरासत में रखा गया हो। इस मामले में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, इसलिए याचिका स्वीकार करने का आधार नहीं बनता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा कि यदि उन्हें बच्चे की कस्टडी को लेकर आपत्ति है, तो वे गार्जियन एंड वार्ड्स एक्ट के तहत उचित कानूनी प्रक्रिया अपना सकते हैं। मनोज राज 25 मार्च 2026