श्योपुर ( ईएमएस ) | चैत की चिलचिलाती धूप में बबूल की छॉव भी प्रकृति का ऐसा वरदान है, जिसके नीचे निरीह प्राणी पशु भी सुकून की तलाश में पनाह लेते है। ऐसा ही दृश्य आज बडौदा-श्योपुर रोड पर पाण्डोला के समीप देखने को मिला, जब कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा फील्ड भ्रमण के दौरान वापस जिला मुख्यालय लौट रहे थे। सरसों के कटे हुए खेत में दूर-दूर तक फेली धूप से बचने के लिए दो पेडो के नीचे पनाह लिये हुए भेड और बकरियों के झुण्ड को देखकर वे रूक गये और कौतुहल वश अनायास खेतो में चलकर उस स्थान पर पहुंचे, जहां भेड और बकरियां खेत में खडे बबूल के पेड के नीचे छॉव में बैठकर सुस्ता रही थी और पास ही चरवाहे भी आराम कर रहे थे। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा को बातचीत में चरवाहों ने बताया कि भेड और बकरियों को चराने के लिए लेकर आये है, क्योंकि चैत में फसल कटने के बाद खेत खाली हो जाते है और खेत में सरसों आदि के डंठल और गेहूं का भूसा चारे के रूप में आसानी से उपलब्ध हो जाता है। श्री नंदा गुर्जर ने बताया कि 150-150 के दो झुण्ड है, जिनमें बकरियां और भेड है। चैत की चिलचिलाती दुपहरी में धूप की तपन से राहत पाने के लिए बकरियां पेडो के नीचे छॉव में बैठ गई है। श्री नंदा गुर्जर ने यह भी बताया कि भेड का दूध बडे काम का होता है, जिन लोगों के फैक्चर हो जाता है, उन्हें भेड के दूध की आवश्यकता होती है, इसका दूध पीने से हड्डी जल्दी जुड जाती है, इसलिए अक्सर लोग उनके पास भेड का दूध लेने के लिए आते है और वह उन लोगों को निशुल्क रूप से भेड का दूध उपलब्ध करा देते है, इसके लिए वे किसी से एक भी पैसा नही लेते है।