लेख
26-Mar-2026
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(27 मार्च विश्व रंगमंच दिवस पर विशेष) वास्त्व में रंगमंच जीवंत कला को समझने.सम्मानित करने का एक अवसर होता है। विश्व रंगमंच दिवस की शुरुआत 1961 में अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान;आईटीआईद्ध द्वारा की गई और 27 मार्च 1962 को पेरिस में ष्थिएटर ऑफ नेशंसष् सत्र के उद्घाटन के साथ मनाया गया। तभी से इस दिन को विश्वभर में विभिन्न कार्यक्रमोंए प्रस्तुतियोंए वार्ताओं और अन्य गतिविधियों के साथ मनाया जाने लगा। नाटक.अभिनय हर संस्कृति का अहम हिस्सा होते हैं। ये वैश्विक स्तर पर समाज और रंगमंच के गहरे प्रभाव की न केवल याद दिलाते हैं बल्कि रंगमंचीय कलात्मकता और रचनात्मकता का जश्न भी मनाते हैं। यह एक ऐसा अवसर और कला का प्रदर्शन है जिससे समाज में सामाजिकए सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व भी सामने आते हैं। दुनिया भर में इस मौके पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नाट्य कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इसी कड़ी में सबसे खास विश्व रंगमंच दिवस के संदेश का प्रसार होता हैए जिसमें अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान के बुलावे पर वैश्विक हस्तियां रंगमंच और शांति की संस्कृति विषय पर अपने विचार साझा करती हैं। इस आयोजन की शुरुआत करते हुए पहला विश्व रंगमंच दिवस संदेश 1962 में जीन कोक्ट्यू जो प्रख्यात फ्रांसीसी लेखकए नाटककार और निर्देशक थेए उनके द्वारा लिखा गया। हर वर्षए थिएटर समुदाय में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति को अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान द्वारा विश्व रंगमंच दिवस संदेश की रचना हेतु चुना जाता हैए जो ष्रंगमंच और शांति की संस्कृतिष् यानी थिएटर एंड ए कल्चर ऑफ पीस की थीम पर आधारित होता है। रंगमंच की खूबसूरती इसी में है कि यह कल्पनाओं पर आधारित न होकर समाज में घटित घटनाओंए मानव भावनाओं और जीवन संघर्षों को प्रभावी ढंग से दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करता है। रंगमंच यानी थिएटर केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि उससे कहीं अधिक है। यह अभिव्यक्ति का प्रभावी और सशक्त जरिया है जो इंसानी अनुभवों और भावनाओं की विविधता को दर्शाता है। इसके जरिए प्राचीन ग्रीक त्रासदियों से अब तक तमाम प्रस्तुतियों का मंचन कर लगातार रंगमंच निखरता रहा है। सच कहें तो पीढ़ियों और संस्कृतियों के दर्शकों के हृदय को यही तो छूता है! दरअसल यह अपनी कहानी कहने का भी मंच प्रदान करता है। अवसर कुछ ऐसा होता है जिसमें व्यक्ति जटिल से जटिल विषयों का अन्वेषण करए चिंतन के लिए बढ़ सकता है। परिवर्तन की प्रेरणा को साकार मूर्त रूप देने का भी यह अवसर होता है। चाहे समाज में जागरूकता बढ़ाना हो या अंधविश्वास उजागर करनाए इन सारे महत्वपूर्ण विषयों में थिएटर की भूमिका अहम होती है। कला के जरिए प्रोत्साहन का इससे बेहतर अवसर और मंच की आवश्यक्ता को यह सिध्द करता है। कार्यशालाओंए प्रदर्शनों और चर्चाओं के जरिए एक दूसरे की भाषा से अनभिज्ञ दुनिया भर के लोग रंगमंच के जादू और इसकी परिवर्तनकारी क्षमता का जश्न मनाते एक साथ आकर भाषा न समझे लेकिनए भावनाओं को समझते हैं। सच कहें तो रंगमंच न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करता हैए बल्कि आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भागीदार होता है। रोजगार सृजन से लेकर पर्यटन के आकर्षण और आर्थिक विकास को गति देने में रंगमंच उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावाए रंगमंच रचनात्मकए आलोचनात्मक सोच और सहानुभूति को बढ़ावा देता हैए जो व्यक्तिगत और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक कौशल है। सांस्कृतिक आदान.प्रदान और संवाद को बढ़ावा देकरए रंगमंच विभिन्न पृष्ठभूमियों के व्यक्तियों के बीच दूरियों को कम करता है और समझ को बढ़ाता है। यह सहयोग और समन्वय भी प्रोत्साहित करता हैए जिससे समुदाय और अपनेपन की भावना विकसित होती है। रंगमंच महज मनोरंजन का साधन न होकर समाज का आईना भी है। जिसमें हमेंए हमारी छवि साफ दिखती है। इसके जरिए समाज की हकीकत भी सामने आती हैं। मंच पर प्रस्तुत सारी कहानियांए संवाद और अभिनय कहीं न कहीं हमारे वास्तविक जीवन की किसी न किसी सच्चाई को प्रतिबिंबित करते हैं। इसका जरिया कुछ भी हो सकता है। चाहे ग्रीक ट्रैजेडी होए कॉमेडी या फिर लोकनाट्य या फिर हमारा मौजूदा थिएटर सबका मकसद एक ही होता है कि किस प्रकार समाज को जागरूक करेंए कैसे नई दिशा और दृष्टि देकरए सुधार ला सकें। भारतीय रंगमंच के संदर्भ में देखें तो इसका बहुत पुराना इतिहास है जो वैदिक काल से जुड़ा हुआ है। इसे भरतमुनि के ष्नाट्य शास्त्रष् द्वारा औपचारिक रूप दिया गया जो कि नाटक पर एक जरूरी ग्रन्थ के रूप में दस्तावेज है। यह ईसा पूर्व 2000 और चौथी शताब्दी के बीच लिखा गया था। यह कहानी कहने की शैलियों से विकसित हुआ जिसमें सस्वर पाठए गायन और नृत्य शामिल थे। शास्त्रीय संस्कृत नाटकए पारंपरिक स्थानीय रूप और समकालीन रंगमंच शामिल हैं। भारतीय नाट्यशास्त्र नाटक के विभिन्न रूपों को न केवल वर्गीकृत करता है बल्कि रंगमंच में अभिनेताओं द्वारा उपयोग की जाने वाली विधियों को भी रेखांकित करता है। पारंपरिक भारतीय रंगमंच नृत्य और नाटक को मिलाते हुए प्रायः हिंदू ग्रंथों में निहित कहानियों को भी प्रदर्शित करते हैं। कथकली विशेष उदाहरण है जिसमें जटिल वेशभूषा और श्रृंगार की विशेषताओं से युक्त अत्यधिक शैलीगत प्रदर्शन होता है। भारत के संदर्भ में कई व्यावसायिक थियेटर ग्रुप अच्छा काम कर रहे हैं। इनसे जुड़कर अच्छे रोजगार की संभावनाएं भी बनती हैं और रंगमंच में पहचान अलग। रंगमंचीय अभिनयए निर्देशनए परिकल्पना और अन्य कई विधाएं जैसे कोरियोग्राफरए आर्ट डायरेक्टरए स्क्रिप्ट लेखकए सेट डिजाइनरए लाइटए साउंड और तकनीक आदि हमारी कला और संस्कृति को जीवंत रखते हुए रोजगार और पहचान के भी बेहतरीन अवसर देती हैं। महान अंग्रेजी नाटककारए कवि अभिनेता रहे विलियम शेक्सपियर को भला कौन नहीं जानता होगा! उनके लिखे दार्शनिक शब्द आज भी यथार्थ के धरातल पर वैसे ही प्रभावी हैंए जितना उन्होंने अपने जीवन काल 1564.1616 के दौरान लिखे थे। ऐसी ही अनेकों रचनाओं ने उन्हें महान नाटककार बनाया। शेक्सपियर आज भी थिएटर के जाने.मानेए प्रभावी व्यक्तित्व हैं। उनके लिखे शब्द श्सारा संसार एक रंगमंच है जिसमें सभी पुरुष.महिलाएं महज कलाकार हैं।श् शेक्सपियर ने हैमलेटए रोमियो.जूलियटए मैकबेथ जैसे 38 से अधिक नाटक और कई सॉनेट लिखे। जीवन वास्तव में एक दार्शनिक सत्यए तथ्य और रंगमंच है जिसमें बाल अवस्था से वृध्दावस्था और मृत्यु तक हमारे ढ़ेरों किरदार होते हैं। कोई नायकए कोई खलनायकए कोई विदूषकए तो कोई विचारक होता है। हम अपने जीवन के अलग.अलग चरणों में भिन्न.भिन्न भूमिकाएं निभाते हैं। इस वर्ष 64वां विश्व रंगमंच दिवस शुक्रवार 25.27 मार्च तक लक्जमबर्ग में हो रहा है। विषय ष्रंगमंच और शांति की संस्कृतिष् हैए जो विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवादए सहानुभूति और समझ को बढ़ावा देने में जीवंत प्रदर्शन की भूमिका पर जोर देता है। इस संदेश को जाने.माने अमेरिकी अभिनेता विलेम डेफो ने लिखा हैए जिसमें रंगमंच के साझा मानवीय अनुभवए चिंतन और नैतिक जुड़ाव को प्रस्तुत किया गया है। सच में रंगमंच हमें अपने जीवन में नई सीखए समझ के साथ हर दिन जीने की प्रेरणा देता है। हमें थिएटर जाना चाहिएए लोगों को प्रेरित भी करना चाहिए। थिएटर के मर्मए धर्म और सत्य को समझना.स्वीकारना चाहिए। जिंदगी में अपने किरदार को पहचानना और जरूरत पड़ने पर बदलना भी चाहिए शायद यही सच्चा थिएटर होगा। ईएमएस / 26 मार्च 26