जबलपुर, (ईएमएस)। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय,जबलपुर के कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा की प्रेरणा से एवं संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉ. जी.के. कौतु के मार्गदर्शन और अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय,जबलपुर डॉ. जयंत भट्ट व वानिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय खरे के दिग्दर्शन में वानिकी विभाग द्वारा ङ्खजलवायु परिवर्तन शमन एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार हेतु एक सतत् कृषि प्रणाली के रूप में कृषि वानिकीङ्ग विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम कुण्डम विकासखण्ड के डुण्डी ग्राम में जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) के तहत अखिल भारतीय समन्वित कृषि वानिकी अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ५० कृषकों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की, जो सतत कृषि पद्धतियों के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सोमनाथ सर्वदे, परियोजना प्रभारी अधिकारी द्वारा किया गया, आपने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए क्षेत्र विशेष के लिए उपयुक्त विभिन्न कृषि वानिकी मॉडल्स पर विस्तार से चर्चा की। परियोजना के सेवानिवृत्त प्रभारी अधिकारी डॉ. एस. बी. अग्रवाल ने कृषि वानिकी के अंतर्गत उगाई जाने वाली विभिन्न मौसमी फसलों के बारे में जानकारी दी तथा कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं पर विशेष प्रकाश डाला। परियोजना के वैज्ञानिक डॉ. यशपाल सिंह ने कृषि वानिकी के बहुआयामी लाभों जैसे आय वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण एवं संसाधन संवर्धन पर अपने विचार साझा किए। वहीं, शोधकर्ता डॉ. कैलाश कुमार ने मृदा स्वास्थ्य सुधार में कृषि वानिकी की भूमिका को रेखांकित करते हुए पोषक तत्व चक्रण एवं जैविक पदार्थ वृद्धि के महत्व को समझाया। कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. मनोज पाठक, फील्ड एक्सटेंशन अधिकारी तथा उमेश सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके सहयोग से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावी एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम किसानों के लिए ज्ञानवर्धन एवं क्षमता निर्माण का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ, जिसने क्षेत्र में कृषि वानिकी को एक सतत एवं लाभकारी कृषि प्रणाली के रूप में बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुनील साहू / मोनिका / 26 मार्च 2026