इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1984 दंगे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए की सख्त टिप्पणी प्रयागराज,(ईएमएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1984 कानपुर सिख विरोधी दंगे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की है। सिख विरोधी दंगे से जुड़े मामलों को रद्द करने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने इसे भीषण नरसंहार बताते हुए आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया है। जस्टिस अनिश कुमार गुप्ता की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने 9 आरोपियों द्वारा दायर 7 याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि केवल देरी या मूल रिकॉर्ड के अभाव के आधार पर मुकदमा खत्म नहीं किया जा सकता। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रदीप अग्रवाल व अन्य की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका दाखिल कर चार्जशीट एवं सीजेएम कानपुर नगर की कोर्ट में चल रही आपराधिक केस कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह घटनाएं देशभर में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हुई हिंसा का हिस्सा थीं, जो एक तरह से नरसंहार जैसा था। आरोपियों ने दलील दी थी कि मूल दस्तावेज जैसे एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए निष्पक्ष विचारण संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने गवाहों के बयान में देरी और पहचान पर भी सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल गठित किया जा चुका है और फिर जांच के आदेश दिए, भले ही मूल रिकॉर्ड उपलब्ध न हों। प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि उस समय जल्दबाजी में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। कोर्ट ने भी माना कि कई रिकॉर्ड नष्ट हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद गवाहों के स्पष्ट बयान और पुनर्निर्मित एफआईआर के आधार पर मामला बनता है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों ने आरोपियों की पहचान की है और घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया है, जिससे प्रथम दृष्टया मामला बनता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने गंभीर मामलों में केवल समय बीत जाने के आधार पर कार्यवाही खत्म नहीं की जा सकती। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया गया साथ ही एक आरोपी द्वारा कहा गया कि घटना स्थल पर मौजूद न होने के तर्क को अदालत ने ट्रायल के दौरान साबित करने योग्य बताया। हाईकोर्ट ने कहा कि इस आधार पर मामला खत्म नहीं किया जा सकता है। हाइकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं और ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही को जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया। सिराज/ईएमएस 26मार्च26 -------------------------------