राष्ट्रीय
26-Mar-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को सुलझाने के प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर निराशा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि भारत को, अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और दोनों पक्षों से संबंधों को देखकर कूटनीतिक नेतृत्व करना चाहिए था। अमेरिका और ईरान के बीच गुप्त मध्यस्थता के प्रयासों में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र की भूमिका की खबरों पर प्रतिक्रिया देकर थरूर ने कहा कि उन्होंने पहले भारतीय सरकार के सतर्क रुख का समर्थन किया था, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि नई दिल्ली एक रचनात्मक शांति पहल करेगा। थरूर ने कहा कि मुझे यह कहते हुए खेद हो रहा है कि फिलहाल हालात अच्छे नहीं हैं। यह हम सभी के लिए थोड़ा शर्मनाक है........मैंने ईरान युद्ध पर मोदी सरकार के संयम और चुप्पी का समर्थन इसकारण किया था क्योंकि मुझे उम्मीद थी कि केंद्र सरकार इसका इस्तेमाल शांति स्थापित करने के लिए करेगी और शांति की अगुवाई करेगी, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि भारत को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिणाम उन उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। कांग्रेस नेता थरूर ने कहा कि उन्होंने भारत से बार-बार आग्रह किया था कि वह अपनी राजनयिक सद्भावना का उपयोग कर संबंधित देशों के बीच सार्थक बातचीत को बढ़ावा दे। उन्होंने जोर दिया कि नई दिल्ली के संतुलित संबंध उस शांति पहल शुरू करने में एक अनूठा लाभ दे सकते थे। उन्होंने कहा कि देखिए, अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है,तब भारत का इससे कोई लेना-देना नहीं है। मैं करीब तीन सप्ताह से भारत से आग्रह कर रहा हूं कि वे दोनों पक्षों के साथ अपने अच्छे संबंधों का लाभ उठाकर शांति पहल में अग्रणी भूमिका निभाए। अब, जाहिर तौर पर, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की ने ऐसा कर दिया है। उन्हें शुभकामनाएं, हम सभी शांति चाहते हैं। लेकिन जब पाकिस्तान शांति वार्ता कर रहा है, तब भारत को कोई श्रेय नहीं मिल रहा है। थरुर की ये टिप्पणियां केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के संदर्भ में आईं, जहां मोदी सरकार ने विपक्षी नेताओं को आश्वस्त किया कि पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत समान स्थिति में बना हुआ है। आशीष दुबे / 26 मार्च 2026