राष्ट्रीय
27-Mar-2026
...


-पूरे देश में एक ही तरह के दस्तावेज जमा करने होंगे, लाइसेंसिंग में आएगी पारदर्शिता नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश भर में एकसमान डोजियर-आधारित लाइसेंस प्रणाली लागू की है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के इस कदम से राज्यों की अलग-अलग व्यवस्था खत्म हो जाएगी। अब कंपनियों को एक ही बार में दवाओं की जांच रिपोर्ट, उत्पादन और गुणवत्ता से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे। पूरे देश में एक ही तरह के दस्तावेज जमा करने होंगे, जिससे लाइसेंसिंग में पारदर्शिता आएगी। आवेदन को दो हिस्सों में बांटकर जांच की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक घटिया दवाओं के निर्माण पर रोक लगेगी और फार्मा कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी। यह आदेश आयुष दवाओं, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल डिवाइसेज पर लागू नहीं होगा। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य दवाओं के निर्माण में एकसमान मानक सुनिश्चित करना है। यह बदलाव दवा उत्पादन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए किया गया है। सीडीएससीओ ने 2026 में भारत में दवा लाइसेंसिंग प्रक्रिया को एक समान बनाने के लिए डोजियर आधारित प्रणाली लागू की है, जो कई राज्यों की अलग-अलग प्रक्रियाओं को समाप्त करती है। अब फार्मा कंपनियों को पूरे देश में दवा उत्पादन के लिए गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभाव से जुड़ी जानकारी एक साथ जमा करनी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग नियम समाप्त हो गए हैं और अब पूरे देश में एक जैसे नियम लागू होंगे। कंपनियों को एक ही बार में, एक ही जगह विस्तृत दस्तावेज़ (डोजियर) जमा करने होंगे। डोजियर की गहराई से जांच के बाद ही स्थानीय औषधि नियंत्रक विभाग द्वारा लाइसेंस देने या न देने की सिफारिश करेगा। यह पहल दवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और फार्मा कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए की गई है। कंपनियों को ऑनलाइन राष्ट्रीय दवा लाइसेंस प्रणाली पोर्टल पर विस्तृत डेटा जमा करना होगा। यह नियम आयुष दवाओं, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा उपकरणों पर लागू नहीं होता है। यह नई व्यवस्था देश भर में दवाओं की गुणवत्ता में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा की गई है, जो अब तक राज्यों के अलग-अलग नियमों के कारण भिन्न थी। सिराज/ईएमएस 27मार्च26