राज्य
27-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 8 साल की बच्ची से रेप मामले में 72 वर्षीय वीर भान को पॉक्सो एक्ट के तहत 20 साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। दिल्ली की तीस हजारी स्थित पॉक्सो कोर्ट ने आठ साल की मासूम बच्ची के साथ रेप के एक झकझोर देने वाले मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 72 वर्षीय बुजुर्ग वीर भान को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। एडिशनल जज बबिता पुनिया की कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 और बीएनएस की धारा 65(2) व 351(2) के तहत दोषी ठहराया है। कोर्ट ने इस कृत्य को बचपन और देश के भविष्य पर हमला करार दिया। दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा सुनाते हुए अदालत ने समाज में बच्चों की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि यह केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि बचपन और देश के भविष्य पर सीधा हमला है। अदालत ने टिप्पणी की कि बच्ची आरोपी को दादा कहकर बुलाती थी। आरोपी ने एक बच्ची के इस पवित्र भरोसे का फायदा उठाया, जो बेहद निंदनीय है। बचाव पक्ष ने आरोपी की 72 वर्ष की उम्र का हवाला देकर सजा में नरमी बरतने की अपील की थी, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। यह खौफनाक घटना 23 दिसंबर 2025 को दिल्ली के निहाल विहार इलाके में हुई थी। पीड़िता की मां का पहले ही निधन हो चुका है और पिता ने परिवार को छोड़ दिया है। मासूम बच्ची अपनी मौसी के साथ रहती है। घटना वाले दिन बच्ची आरोपी वीर भान की दुकान पर टॉफी खरीदने गई थी। आरोप है कि बुजुर्ग ने उसे टॉफी देने के बहाने दुकान के अंदर बुलाया, उसके साथ गलत काम किया और किसी को भी बताने पर जान से मारने की धमकी दी। इस दरिंदगी का खुलासा तब हुआ जब आरोपी की बहू ने दुकान में कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखीं। उसने बच्ची को डांटकर वहां से भगा दिया। बाद में पड़ोस की एक महिला के जरिए यह बात बच्ची की मौसी तक पहुंची, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी सबूत बहुत अहम साबित हुए। इन्हीं ठोस सबूतों के आधार पर अभियोजन पक्ष अदालत में आरोपी का जुर्म साबित करने में सफल रहा। अदालत ने केवल सजा सुनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि बच्ची के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी अहम कदम उठाए। कोर्ट ने पीड़िता के बेहतर पुनर्वास के लिए 13.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। शिक्षा विभाग को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि पीड़िता की 12वीं तक की पढ़ाई और आगे का कमर्शियल प्रशिक्षण बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित किया जाए। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/27/ मार्च/2026