नई दिल्ली,(ईएमएस)। मध्य-पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक संकट के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की कमी को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और पंजाब सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सामान्य है और नागरिकों को घबराकर खरीदारी (पैनिक बाइंग) करने की कतई आवश्यकता नहीं है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के दौर में ईंधन की कीमतों पर उत्पाद शुल्क में कटौती के केंद्र के फैसले की सराहना की। उन्होंने आश्वस्त किया कि देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और भारत के पास 60 दिनों से अधिक का सुरक्षित घरेलू ईंधन भंडार मौजूद है। उन्होंने लॉकडाउन जैसी खबरों को भ्रामक बताते हुए अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इसी क्रम में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्षभाई ने गांधीनगर में जानकारी दी कि राज्य में स्थिति नियंत्रण में है और अब तक अफवाह फैलाने वाले 17 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। दक्षिण भारत में तेलंगाना के नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने बताया कि राज्य के पास अगले तीन महीनों के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ पेट्रोल पंपों पर अस्थायी नो स्टॉक के बोर्ड टैंकरों की आवाजाही में सामान्य देरी के कारण हो सकते हैं, न कि किसी वास्तविक संकट की वजह से। वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी केंद्र सरकार की गारंटी का हवाला देते हुए एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की निरंतर आपूर्ति का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन रोजाना आधार पर स्टॉक की निगरानी कर रहा है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी अपने-अपने राज्यों में जमाखोरी के खिलाफ कड़े निर्देश जारी किए हैं। सीएम मान ने नागरिकों को आगाह किया कि जरूरत से ज्यादा ईंधन का भंडारण करना खतरनाक हो सकता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और प्रमुख तेल कंपनियों ने भी दोहराया है कि रिफाइनरियां सुचारू रूप से चल रही हैं और हालिया भीड़ का एकमात्र कारण गलत सूचनाएं हैं। सरकारों ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें और समाज में डर का माहौल पैदा करने वाली गतिविधियों से दूर रहें। वीरेंद्र/ईएमएस/29मार्च2026