क्षेत्रीय
29-Mar-2026
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- तिहरा हत्याकांड के दो आरोपियों की उम्रकैद बरकरार - परिस्थितिजन्य साक्ष्य की कड़ी अधूरी, तीनों को मिला संदेह का लाभ बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा जिले के बहुचर्चित (पूर्व डिप्टी सीएम के बेटे-बहू और पोती की हत्या) ट्रिपल मर्डर मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों में से दो की सजा बरकरार रखी है, जबकि तीन को बरी कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल संदेह, रिश्तेदारी या कॉल डिटेल्स के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला पुख्ता तरीके से स्थापित न हो। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने परमेश्वर कंवर और रामप्रसाद मननेवार को दोषी मानते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को यथावत रखा, वहीं हरभजन कंवर, धनकुंवर और सुरेंद्र सिंह कंवर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। 2021 में हुई थी तीन लोगों की निर्मम हत्या, घर में मिला था खून से सना मंजर मामला 21 अप्रैल 2021 का है, जब कोरबा जिले में अविभाजित मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम रहे स्व प्यारेलाल कंवर के बेटे हरीश कंवर, बहू पत्नी सुमित्रा कंवर और पोती याशिका कंवर की उनके ही घर में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस को सूचना मिलने पर घर के अंदर तीनों के शव खून से लथपथ हालत में मिले थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि सभी की मौत सिर पर गंभीर चोट और धारदार हथियार से किए गए हमले के कारण हुई। कोर्ट ने इसे स्पष्ट रूप से हत्या (हॉमिसाइडल डेथ) माना। परिवारिक विवाद बना हत्या का कारण, पेंशन और संपत्ति को लेकर चल रहा था तनाव मामले की जांच में सामने आया कि मृतक और आरोपियों के बीच पारिवारिक संपत्ति और पेंशन राशि को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। गवाहों ने भी कोर्ट में इस बात की पुष्टि की कि आरोपियों द्वारा मृतक को कई बार धमकाया गया था। हालांकि कोर्ट ने माना कि केवल विवाद होना ही साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जब तक उसके समर्थन में ठोस साक्ष्य न हों। आई-विटनेस की गवाही और मेडिकल सबूतों ने दो आरोपियों को ठहराया दोषी कोर्ट ने अपने फैसले में मृतक की मां जीवन बाई की गवाही को बेहद महत्वपूर्ण माना, जिन्होंने घटना के दौरान आरोपियों को वारदात करते हुए देखने की बात कही। कोर्ट ने उनकी गवाही को विश्वसनीय और सुसंगत बताया। इसके अलावा, आरोपियों परमेश्वर और रामप्रसाद के शरीर पर पाए गए चोट के निशान, बरामद हथियार, खून से सने कपड़े और एफएसएल रिपोर्ट ने भी उनके अपराध में शामिल होने की पुष्टि की। टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड में भी दोनों आरोपियों की पहचान हुई, जिससे उनके खिलाफ साक्ष्य और मजबूत हुए। सीडीआर और कॉल डिटेल्स से साजिश साबित नहीं, तीन आरोपियों को मिली राहत अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ मुख्य रूप से मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और आपसी संपर्क को आधार बनाया गया था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कॉल होने से साजिश साबित नहीं होती, जब तक बातचीत की प्रकृति और उद्देश्य स्पष्ट न हो। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य के मामलों में हर कड़ी का पूर्ण और स्पष्ट होना आवश्यक है। इसी आधार पर हरभजन कंवर, धनकुंवर और सुरेंद्र सिंह कंवर को दोषमुक्त करते हुए रिहा करने का आदेश दिया गया। कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- संदेह कितना भी मजबूत हो, प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दोहराया कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए साक्ष्य का स्तर संदेह से परे होना चाहिए। यदि साक्ष्यों की श्रृंखला में कोई भी कड़ी कमजोर होती है, तो आरोपी को लाभ मिलना ही चाहिए। इस फैसले के साथ कोर्ट ने दो दोषियों की सजा को कायम रखते हुए तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। मनोज राज 29 मार्च 2026