- फॉरेंसिक तकनीकों से मजबूत होगी विवेचना बिलासपुर (ईएमएस)। पुलिस विभाग अपराध जांच को अधिक सटीक, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में शनिवार को बिलासागुड़ी पुलिस लाइन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें अधिकारियों को फॉरेंसिक तकनीकों और साक्ष्य प्रबंधन की महत्वपूर्ण बारीकियों से अवगत कराया गया। पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में राजपत्रित अधिकारियों, थाना/चौकी प्रभारियों और विवेचकों सहित कुल 75 अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अपराध जांच में फॉरेंसिक विज्ञान की उपयोगिता को समझाना तथा विवेचना के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों को दूर करना था। प्रशिक्षण के दौरान अपराध स्थल के वैज्ञानिक निरीक्षण, साक्ष्यों के महत्व, तथा तलाशी और जब्ती की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी पर विशेष जोर दिया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. समीर कुर्रे और वैज्ञानिक अधिकारी प्रशांत कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वैज्ञानिक तरीकों का सही उपयोग अपराधों की गुत्थी सुलझाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घटनास्थल की सटीक फोटोग्राफी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ न्यायालय में उन्हें मजबूत प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करने में सहायक होती है। गंभीर अपराधों की विवेचना से जुड़े अनुभव साझा उप निरीक्षक कृष्णा साहू ने गंभीर आपराधिक प्रकरणों की विवेचना से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कई मामलों में चश्मदीद गवाहों के मुकर जाने के बावजूद, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और मजबूत दस्तावेजीकरण के आधार पर आरोपियों को सजा दिलाई जा सकती है। उन्होंने घटनास्थल का नक्शा तैयार करने, जब्ती और तलाशी से संबंधित दस्तावेजों की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। कृत्रिम घटनास्थल पर दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण कृत्रिम घटनास्थल का निर्माण रहा, जहां अधिकारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान साक्ष्यों की पहचान, उन्हें सुरक्षित करना, सीलबंद पैकिंग करना तथा समयबद्ध तरीके से एफएसएल परीक्षण हेतु भेजने की प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया। मनोज राज 29 मार्च 2026