राज्य
29-Mar-2026


-मिशन कर्मयोगी: कैपेसिटी बिल्डिंग से तय होगा अफसरों और कर्मचारियों का प्रमोशन भोपाल (ईएमएस)। मिशन कर्मयोगी के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम अनिवार्य है। इसे कर्मचारियों के प्रमोशन एवं एसीआर से भी जोड़ा जाएगा। लेकिन विडंबना यह है कि मप्र में कई विभागों के कोर्स ही अभी तक तय नहीं हो पाए हैं। वहीं शासन ने साफ कर दिया है कि भविष्य में पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों के लिए मिशन कर्मयोगी की ट्रेनिंग को अनिवार्य माना जाएगा। ऐसे में मिशन कर्मयोगी का प्रशिक्षण न लेने वाले कर्मचारियों के प्रमोशन भी अटक सकते हैं। अब मिशन कर्मयोगी की डेडलाइन नजदीक आने के बाद सरकारी विभागों में सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश के लगभग 8 लाख कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन आंकड़ों में नियमित पदों पर कार्यरत लगभग 4.5 लाख कर्मचारी और विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे करीब 3.5 लाख संविदा कर्मचारी शामिल हैं। शासन ने साफ कर दिया है कि भविष्य में पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों के लिए मिशन कर्मयोगी की ट्रेनिंग को अनिवार्य माना जाएगा। ऐसे में मिशन कर्मयोगी का प्रशिक्षण न लेने वाले कर्मचारियों के प्रमोशन भी अटक सकते हैं। मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन के लिए विभाग अब डेडलाइन नजदीक आने पर सख्ती दिखाते नजर आ रहे हैं। पहले इस कोर्स को पूरा करने के लिए 31 मार्च की डेडलाइन तय की गई थी, लेकिन कई विभागों में कोर्स मॉड्यूल तैयार न होने और तकनीकी कारणों को देखते हुए अब इस समय सीमा को बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है। इस बढ़ी हुई समय सीमा के बावजूद कई बड़े विभागों ने अब तक अपने कर्मचारियों के लिए विशिष्ट कोर्स मॉड्यूल तक तैयार नहीं किए हैं। प्रत्येक विभाग को अपने कार्यक्षेत्र के अनुसार अलग मॉड्यूल तैयार करने थे, ताकि प्रशिक्षण केवल कागजी न रहकर व्यावहारिक बन सके। कई बड़े विभाग कोर्स तय करने में पिछड़े प्रदेश सरकार के वन विभाग, जल संसाधन विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उच्च शिक्षा, राजस्व आदि विभागों में तो मिशन कर्मयोगी की ट्रेनिंग और परीक्षा के लिए कोर्स के मॉड्यूल ही तय नहीं हो पाए हैं। इन विभागों में तो सभी कर्मचारियों का पोर्टल पर पंजीयन तक नहीं हो पाया है। मिशन कर्मयोगी के पोर्टल पर अलग अलग विषयों के 4300 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं, लेकिन राच्य की सरकारी जानकारी के अनुसार निर्माण और ऊर्जा से जुड़े विभागों के कर्मचारियों के कोर्स में बेसिक इंजीनियरिंग और अन्य विभागों में उनके कामकाज से संबंधित जानकारी कोर्स में शामिल की जानी है। हालांकि, राच्य शासन के मुख्य सचिव कार्यालय और सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा लगातार रिमाइंडर के बाद अब विभाग युद्ध स्तर पर इसकी तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही कई विभाग तो ऐसे भी हैं, जहां मिशन कर्मयोगी के लिए सभी कर्मचारियों का ऑनलाइन पंजीयन ही नहीं हो पाया है। मिशन का मकसद कार्यक्षमता सुधारना मिशन कर्मयोगी का मकसद सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता में व्यापक सुधार लाना है। इसका टारगेट विभागों और प्रशासन को नियम के बजाय भूमिका आधारित बनाना है। इसके जरिए कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक, सॉफ्ट स्किल्स और पेशेवर प्रशिक्षण दिया जाना है। वहीं मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा विभागों को दिए गए निर्देशों से साफ है कि प्रदेश सरकार केंद्र के द्वारा तैयार इस प्रशिक्षण को लेकर बेहद सख्त है। जीएडी के निर्देश के अनुसार मिशन कर्मयोगी की ट्रेनिंग अब वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट (एसीआर) का हिस्सा बनेगी। इस प्रशिक्षण के लिए नियमित और संविदा, दोनों श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन और निर्धारित कोर्स पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है। जिन विभागों ने अभी तक मॉड्यूल अपलोड नहीं किए हैं, उन्हें जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि 8 लाख कर्मचारियों की विशाल संख्या को बढ़ी हुई डेडलाइन यानी 30 अप्रैल तक प्रशिक्षित किया जा सके। मिशन कर्मयोगी के तहत 70 फीसदी ट्रेनिंग डिजिटल माध्यमों से होगी और इसमें राच्य के स्थानीय मामलों और जानकारी से जुड़े कोर्स बनाए जाने हैं। इन कोर्स में एआई और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से जुड़े चैप्टर भी शामिल होंगे। विनोद / 29 मार्च 26