भ्रष्ट अफसरों की कमाई का बड़ा धंधा, धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण धर्मेन्द्र राघव अलीगढ़ (ईएमएस)। शहर के विकास प्राधिकरण के कार्यालय चले जाइए, बाहर घूमते दलालों की फौज यह बताते हुए नजर आती है कि वहां किस पैमाने पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तो यह है कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के तमाम दावों के बावजूद आम लोगों का रिश्वत दिए बिना कोई काम हो पाना, आज भी उतना ही मुश्किल है जितना कई वर्षों या दशकों पहले हुआ करता था। शहरीकरण की दौड़ में भ्रष्टाचार और बिल्डरों की मनमानी हालत यह है कि कोई भी व्यक्ति अपना निजी रिहायशी मकान बनवाने के लिए जैसे ही घर के सामने रेत, रोड़ी, बदरपुर और ईंट मंगवाते हैं वैसे ही पुलिस और नगर निगम अथवा विकास प्राधिकरण का कोई न कोई बंदा रिश्वत की मांग को लेकर पहुंच जाता है। लेकिन इन्ही के इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण होते रहते हैं, बिल्डरों की मनमानी चलती रहती है और ये चुप्पी साध कर बैठे रहते हैं। मंजूरगढ़ी बाईपास पर बनी अवैध इमारत हालात कहीं ज्यादा भयावह और बेकाबू हो चुके हैं। शहरीकरण की अंधी दौड़ में भ्रष्टाचार और बिल्डरों की मनमानी के कारण आम लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। क्या अवैध निर्माण पर तय होनी चाहिए अधिकारियों की जिम्मेदारी ऐसे में एक बार फिर से यही सवाल उठ कर सामने आ रहा है कि क्या अवैध निर्माण को लेकर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की जानी चाहिए। जिन अधिकारियों के कार्यकाल में इस तरह के अवैध निर्माण होते हैं, क्या उनके लिए भी सजा का कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए। शहर के कई इलाकों में तो प्लाटिंग करके जमीनों को लोगों को बेच दिया। कई जगह पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए बेचा गया और कई जगह बकायदा रजिस्ट्री भी करवाई गई लेकिन वर्षों बाद उसे सरकारी जमीन बता दिया जाता है। तो ऐसे में क्या उस दौरान इन जिलों में तैनात रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ? जरूर होनी चाहिए, बल्कि अगर ऐसे अधिकारी रिटायर भी हो गए हों तो भी उनके खिलाफकड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। तभी भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के इस जिन्न को बोतल में बंद करने में कामयाबी मिल पाएगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो तय मान कर चलिए कि भ्रष्टाचार, अवैध निर्माण और बिल्डरों की मनमानी के खिलाफ सब लफ्फाजी ही कर रहे हैं। भ्रष्ट अफसरों की कमाई का बड़ा धंधा, धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण शहर की कॉलोनियों में नगर निगम के नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम अवैध निर्माण हो रहे हैं, लेकिन बड़ी बात तो ये है कि इन निर्माण कार्यों के बारे में नगर निगम के अधिकारी को कोई जानकारी नहीं है, या फिर वो जानबूझ कर अनजान बन रहे हैं। वहीं खतरा इस बात का भी है कि ये अवैध निर्माण कभी भी किसी भी हादसे को अंजाम दे सकते हैं। औद्योगिक सेक्टर हो या फिर रेजीडेंशियल कॉलोनी या फिर अनअप्रूव्ड कॉलोनी हर जगह इसी तरह के हाल बने हुए हैं। इतना ही नहीं इन कॉलोनियों में बनने वाले कारखानों के पास ना तो नगर निगम से नक्शा पास है और ना ही फायर ब्रिगेड से कोई एनओसी ली जाती है। निर्माण करने वाले खोल रहे भ्रष्टाचार की पोल दिन दहाड़े इस तरह के बनने वाले अवैध निर्माण प्रशासनिक मिलीभगत के नहीं हो सकते है। अवैध निर्माण करने वाले लोग खुद इस बात को मानते हैं कि विभाग के अधिकारी पैसे लेकर ऐसे निर्माण को इजाजत दे देते हैं। हैरान करने वाली बात तो ये है कि तोड़फोड़ विभाग चुप्पी साधे बैठा हैं. प्रशासन की तरफसे इन अवैध निर्माणों को न कोई देखने वाला है और न रोकने वाला. ऐसे में अंदेशा होता है कि यह पूरा खेल तोड़फोड़ विभाग के संरक्षण में हो रहा है। ईएमएस / 29/03/2026