क्षेत्रीय
29-Mar-2026
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खौफनाक मंजर, पलभर में कार बनी आग का गोला एक झटके में उजड़ गया पूरा परिवार तेज रफ्तार या नींद की झपकी बना काल बैहर-मलाजखंड रोड पर हुआ सडक़ हादसा बालाघाट (ईएमएस). शनिवार देर रात बालाघाट जिले में हुआ एक भीषण सडक़ हादसा कई जिंदगियां लील गया। बैहर-मलाजखंड मार्ग पर केवलारी चौराहे के पास एक चलती कार के आग का गोला बनने से एक ही परिवार के तीन लोगों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस भयावह मंजर के बीच एक 8 साल की मासूम बच्ची का सुरक्षित बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिले के बैहर-मलाजखंड रोड पर शनिवार देर रात करीब 11.30 बजे हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। केवलारी चौराहे के पास एक आल्टो कार अचानक अनियंत्रित होकर सडक़ से नीचे उतर गई और टकराते ही उसमें भीषण आग लग गई। देखते ही देखते कार आग के गोले में तब्दील हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कार में सवार लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका। अंदर फंसे लोगों की चीखें रात के सन्नाटे को चीरती रहीं, लेकिन लपटों की भयावहता के आगे सब बेबस नजर आए। गांव से लौट रहा था परिवार प्राप्त जानकारी के अनुसार चालक सीतम केलकर अपने गृह ग्राम पोण्डी (परसवाड़ा) से पौनी लौट रहा था, जहां उसकी वेल्डिंग की दुकान है। कार में उनकी पत्नी सविता केलकर, तीन वर्षीय पुत्र अभि, पिता नगारची केलकर और मां नानाबाई केलकर सवार थे। साथ में पड़ोस की 8 वर्षीय बच्ची पूर्वी राहांगडाले भी मौजूद थी। लपटों में समा गई तीन जिंदगियां हादसे के बाद कार में लगी आग ने इतनी तेजी से विकराल रूप ले लिया कि पिता नगारची केलकर (65), पत्नी सविता केलकर (28) और मासूम पुत्र अभि केलकर (3) को बाहर निकालने का मौका नहीं मिल सका और वे जिंदा जल गए। यह मंजर इतना भयावह था कि देखने वालों की रूह कांप उठी। राहगीरों की बहादुरी, बची मासूम की जान मौके पर मौजूद राहगीरों ने साहस का परिचय देते हुए कार की खिडक़ी तोडकऱ 8 वर्षीय पूर्वी को सुरक्षित बाहर निकाला। साथ ही चालक सीतम केलकर (30) और उनकी मां नानाबाई केलकर (60) को भी गंभीर हालत में बाहर निकाला गया। घायलों का इलाज जारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गंभीर रूप से घायल दोनों को इलाज के लिए गोंदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। संभावित कारण रफ्तार या नींद की झपकी बैहर थाना प्रभारी जयंत मर्सकोले के अनुसार, प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और वाहन के अनियंत्रित होने की बात सामने आई है। वहीं प्रथम दृष्टया चालक को नींद की झपकी आने की भी आशंका जताई जा रही है। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। उठे सडक़ सुरक्षा पर सवाल इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर रात में ड्राइविंग की सुरक्षा, तेज रफ्तार और थकान के खतरों को उजागर कर दिया है। एक पल की चूक ने न केवल तीन जिंदगियां छीन लीं, बल्कि एक पूरा परिवार उजाड़ दिया। यह हादसा पीछे छोड़ गया है दर्द, चीखें और ऐसे सवाल—जिनका जवाब ढूंढना अब बेहद जरूरी हो गया है। भानेश साकुरे / 29 मार्च 2026