मन एक भीरु शत्रु है जो सदैव पीठ के पीछे से वार करता है। - प्रेमचंद मौन और एकान्त, आत्मा के सर्वोत्तम मित्र हैं। - विनोबा भावे ईएमएस / 30 मार्च 26
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