अंतर्राष्ट्रीय
30-Mar-2026
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लंदन (ईएमएस)। बच्चों के पालन-पोषण को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि माता-पिता अनुशासन के नाम पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण और कठोरता अपनाते हैं, तो इसका असर बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है। पालकों को अनुशासन और अत्यधिक सख्ती के बीच की सीमा को समझना बेहद जरूरी है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार अत्यधिक सख्त वातावरण में पले-बढ़े बच्चे अक्सर आत्मविश्वास की कमी का सामना करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के मन में डर के बजाय सम्मान और विश्वास की भावना विकसित करना ही स्वस्थ और सकारात्मक परवरिश की सबसे मजबूत नींव है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञ बताते हैं कि जब माता-पिता बच्चों के हर छोटे-बड़े फैसले को नियंत्रित करने लगते हैं और छोटी गलती पर भी सजा देते हैं, तो बच्चों में डर की भावना घर कर जाती है। ऐसे बच्चे खुद पर भरोसा करना कम कर देते हैं और हर समय गलती होने की आशंका में जीते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि वे नए काम करने या जोखिम लेने से बचने लगते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनसे हर स्थिति में पूर्णता की अपेक्षा की जा रही है। मनोवैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि अत्यधिक सख्ती का एक और नकारात्मक प्रभाव बच्चों के व्यवहार पर पड़ता है। सजा के डर से कई बच्चे अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय उन्हें छिपाने की कोशिश करने लगते हैं। धीरे-धीरे झूठ बोलना या बातें छिपाना उनके व्यवहार का हिस्सा बन सकता है। इससे माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की दूरी बढ़ने लगती है और आपसी भरोसा कमजोर पड़ जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ज्यादा सख्त माहौल में पले बच्चे अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। वे खुद को दूसरों से अलग-थलग महसूस करने लगते हैं। कई मामलों में किशोरावस्था में यही दबाव विद्रोही व्यवहार का कारण बन जाता है। जो बच्चे बचपन में चुपचाप नियम मानते हैं, वे बड़े होकर आक्रामक या विरोधी रवैया अपना सकते हैं। इसके अलावा अत्यधिक नियंत्रण के कारण बच्चों में चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। मनोस्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर परवरिश के लिए अनुशासन के साथ प्यार, संवाद और भरोसे का संतुलन जरूरी है। माता-पिता को बच्चों को सिर्फ आदेश देने के बजाय उनकी बात भी सुननी चाहिए और नियमों के पीछे का कारण समझाना चाहिए। गलती होने पर दंड देने की जगह उन्हें सुधार का अवसर देना ज्यादा प्रभावी माना जाता है। सुदामा/ईएमएस 30 मार्च 2026