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30-Mar-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। क्या किसी कंपनी के डीमैट अकाउंट फ्रीज होने से उसकी दिवालिया प्रक्रिया रुक सकती है? इस बात पर अब तस्वीर साफ हो चुकी है। देश के कॉर्पोरेट कानून ढांचे में एक महत्वपूर्ण फैसले में, राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की दलीलों को खारिज कर स्पष्ट कर दिया हैं कि दिवालिया प्रक्रिया के दौरान डीमैट खातों को डी-फ्रीज करने का अधिकार एनसीएलटी के पास है। यह विवाद दो कंपनियों फ्यूचर कॉर्पोरेट रिसोर्सेज और लिज ट्रेडर्स एंड एजेंट्स से जुड़ा था। इन कंपनियों के डीमैट अकाउंट्स को बीएसई ने फ्रीज किया था। इसकी वजह थी सालाना लिस्टिंग फीस का भुगतान न करना, एलओडीआर नियमों का उल्लंघन और जुर्माने की बकाया राशि। जब ये कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया (सीआईआरपी) से गुजर रही थीं, तब उनके रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स और लिक्विडेटर्स ने एनसीएलटी में अपील की। उनका मकसद था कि डीमैट अकाउंट डी-फ्रीज किए जाएं, ताकि उसमें मौजूद शेयर बेचकर कर्जदाताओं को भुगतान कर सके। मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने अलग-अलग आदेशों में बीएसई को इन अकाउंट्स को डी-फ्रीज करने का निर्देश दिया था। बीएसई ने इन फैसलों को चुनौती देकर अपील दायर की। इसके बाद अपीलीय अधिकरण ने साफ कहा कि एनसीएलटी ने अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर रहकर ही आदेश दिए हैं। अधिकरण के अनुसार, डीमैट अकाउंट डी-फ्रीज करने का मुद्दा सीधे तौर पर दिवालिया प्रक्रिया से जुड़ा है, इसलिए इस सुनने का अधिकार एनसीएलटी के पास है। पीठ में शामिल न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान और नरेश सलेचा ने कहा कि इन अकाउंट्स में मौजूद शेयरों के स्वामित्व पर कोई विवाद नहीं है और इन्हें बेचकर कर्ज चुकाना पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। जबकि बीएसई का तर्क था कि यह मामला सिक्योरिटीज कानूनों और सेबी के नियमों के तहत आता है, इसलिए एनसीएलटी का इसमें कोई अधिकार नहीं बनता। लेकिन अपीलीय अधिकरण ने इस दलील को खारिज किया। आशीष दुबे / 30 मार्च 2026