प्योंगयांग,(ईएमएस)। उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन द्वारा रविवार को उच्च-क्षमता वाले ठोस-ईंधन इंजन के सफल परीक्षण ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गलियारों में खतरे की घंटी बजा दी है। सरकारी मीडिया के अनुसार, इस नए इंजन की क्षमता 2,500 किलोटन मापी गई है, जो पिछले परीक्षणों की तुलना में काफी अधिक शक्तिशाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीकी अपग्रेड का सबसे बड़ा और सीधा असर अमेरिका की मिसाइल डिफेंस प्रणाली की प्रभावशीलता पर पड़ेगा। इस परीक्षण का प्राथमिक प्रभाव उत्तर कोरिया की फर्स्ट स्ट्राइक या त्वरित हमले की क्षमता में वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है। तरल ईंधन वाली मिसाइलों के विपरीत, ठोस-ईंधन वाली मिसाइलों को लॉन्च करने के लिए लंबी तैयारी की आवश्यकता नहीं होती। इसका अर्थ यह है कि उत्तर कोरिया अब बहुत कम समय में और बिना किसी पूर्व चेतावनी के मिसाइल दाग सकता है। अमेरिकी जासूसी उपग्रहों और रडार प्रणालियों के लिए ऐसी मिसाइलों को लॉन्च पैड पर ही पहचानना और नष्ट करना (इंटरसेप्ट करना) लगभग असंभव हो जाएगा। यह क्षमता किम जोंग उन को एक रणनीतिक बढ़त देती है, जिससे वे किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई का तत्काल जवाब दे सकेंगे। दूसरा महत्वपूर्ण असर मल्टीपल वॉरहेड्स तकनीक के विकास पर पड़ेगा। इंजन की शक्ति बढ़ने से अब एक ही अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल पर कई परमाणु हथियार लादे जा सकेंगे। यदि एक मिसाइल से अलग-अलग शहरों को निशाना बनाने वाले कई वॉरहेड निकलते हैं, तो अमेरिका का मिसाइल डिफेंस शील्ड भ्रमित हो सकता है। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की यह क्षमता किसी भी आधुनिक रक्षा तंत्र को चकमा देने के लिए पर्याप्त है। वैश्विक राजनीति के स्तर पर, यह परीक्षण उत्तर कोरिया को एक अपरिवर्तनीय परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। किम जोंग उन का यह दावा कि यह परीक्षण देश की सामरिक शक्ति के लिए अत्यधिक जरूरी है, स्पष्ट करता है कि वे कूटनीतिक दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। इससे आने वाले समय में प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ तनाव और गहराएगा। साथ ही, मध्य-पूर्व के संघर्षों के बीच उत्तर कोरिया का यह आक्रामक रुख दुनिया को एक नए शीत युद्ध या परमाणु प्रतिस्पर्धा की ओर धकेल सकता है, जिससे वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती खड़ी हो गई है। वीरेंद्र/ईएमएस 30 मार्च 2026