राष्ट्रीय
31-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। हमारे शरीर में मौजूद किडनी खून को साफ करने, टॉक्सिन्स बाहर निकालने, तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने और इलेक्ट्रोलाइट्स को नियंत्रित करने जैसे अहम कार्य करती हैं। साथ ही ये ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आसान शब्दों में कहें तो किडनी हमारे शरीर का प्राकृतिक “फिल्टर सिस्टम” हैं। ज़्यादातर लोग अपनी किडनी की सेहत पर उतना ध्यान नहीं देते, जितना दिल या फेफड़ों पर देते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि किडनी चुपचाप बिना किसी संकेत के लगातार काम करती रहती हैं। समस्या तब शुरू होती है जब किडनी धीरे-धीरे खराब होने लगती हैं, लेकिन शुरुआती दौर में इसके लक्षण साफ तौर पर नजर नहीं आते। हल्की थकान, शरीर में सूजन या पेशाब की आदतों में बदलाव जैसे संकेत अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्पष्ट लक्षण सामने आते हैं, तब तक किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है। दरअसल, हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें किडनी पर धीरे-धीरे बुरा असर डालती हैं। कम पानी पीना शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने का कारण बनता है, जिससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वहीं ज्यादा नमक का सेवन हाई ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है, जो किडनी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार दर्द निवारक दवाओं का सेवन भी किडनी को नुकसान पहुंचाता है, खासकर जब इसे लंबे समय तक लिया जाए। इसके अलावा देर तक पेशाब रोकना और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन भी किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।अच्छी बात यह है कि किडनी को स्वस्थ रखने के लिए बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती। रोज पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नमक का सेवन सीमित करना, संतुलित आहार लेना जिसमें फल और सब्जियां शामिल हों, नियमित व्यायाम करना और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन न करना ये सभी छोटे कदम किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि किडनी तब तक संकेत नहीं देतीं, जब तक नुकसान गंभीर न हो जाए। किडनी खराब होने के कुछ शुरुआती संकेतों में पैरों या चेहरे पर सूजन, लगातार थकान, पेशाब की मात्रा या रंग में बदलाव और बार-बार यूरिन इन्फेक्शन शामिल हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। सुदामा/ईएमएस 31 मार्च 2026