राष्ट्रीय
31-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। हमारी रसोई में मौजूद कुछ साधारण दालें ‘बैड कॉलेस्ट्रोल’ (एलडीएल) की समस्या से लड़ने में बेहद कारगर साबित हो सकती हैं। भारतीयों के किचन में मौजूद लाल मसूर और हरी मूंग की दाल फाइबर का बेहतरीन स्रोत होती हैं। लाल मसूर में घुलनशील फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जो शरीर से अतिरिक्त वसा और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। वहीं हरी मूंग की दाल हल्की और आसानी से पचने वाली होती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर धमनियों में कॉलेस्ट्रोल को जमने से रोकते हैं। नियमित सेवन से ये दोनों दालें दिल को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होती हैं। काली उड़द और चने की दाल भी इस दिशा में अहम भूमिका निभाती हैं। काली उड़द न केवल ‘गंदे कॉलेस्ट्रोल’ को कम करने में मदद करती है, बल्कि शरीर में ‘अच्छे कॉलेस्ट्रोल’ (एचडीएल) को बढ़ाने में भी सहायक होती है। इसमें मौजूद पोटैशियम और मैग्नीशियम दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को संतुलित बनाए रखते हैं। इसी तरह चने की दाल कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और उच्च फाइबर के कारण कॉलेस्ट्रोल को नियंत्रित करने में प्रभावी मानी जाती है। छोले और राजमा भी पोषण से भरपूर विकल्प हैं। छोले में प्रचुर मात्रा में फाइबर और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन होता है, जो शरीर में जमा अतिरिक्त फैट को नियंत्रित करने में मदद करता है। वहीं राजमा, जिसे अक्सर भारी भोजन माना जाता है, सही मात्रा और तरीके से सेवन करने पर दिल के लिए फायदेमंद साबित होता है। इसमें मौजूद फाइबर और पोटैशियम हाई ब्लड प्रेशर को कम करने के साथ-साथ कॉलेस्ट्रोल स्तर को भी संतुलित रखने में मदद करते हैं। कुल मिलाकर, यदि आप अपनी डाइट में इन दालों को नियमित रूप से शामिल करते हैं, तो यह न केवल आपके शरीर को आवश्यक पोषण देंगे, बल्कि आपकी धमनियों को साफ रखने और दिल को स्वस्थ बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएंगे। हालांकि संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ ही इनका अधिकतम लाभ मिलता है। बता दें कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित खान-पान का असर सबसे ज्यादा हमारे खून पर पड़ता है। धीरे-धीरे शरीर में ‘बैड कॉलेस्ट्रोल’ (एलडीएल) बढ़ने लगता है, जो रक्त धमनियों में जमा होकर खून के प्रवाह को बाधित करता है। इससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। सुदामा/ईएमएस 31 मार्च 2026