राष्ट्रीय
31-Mar-2026
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प्रयागराज,(ईएमएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और बालिगों के अधिकारों को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि दो बालिग व्यक्ति अपनी पसंद से विवाह (प्रेम विवाह) करते हैं, तो कोई भी अन्य व्यक्ति या परिवार इसे अपनी प्रतिष्ठा या सम्मान का मुद्दा नहीं बना सकता। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने रेखांकित किया कि ऐसे मामलों में राज्य का यह प्राथमिक दायित्व है कि वह दंपति के जीवन, उनकी स्वतंत्रता और संपत्ति की रक्षा करे, भले ही उन्हें खतरा उनके अपने ही परिवार के सदस्यों से क्यों न हो। यह मामला एक ऐसे जोड़े से जुड़ा था, जिसने अपनी मर्जी से आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था और उनके पास वैध विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र भी मौजूद था। दंपति ने अदालत को बताया कि महिला के परिवार वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ हैं और उन्होंने उनके विरुद्ध झूठा आपराधिक मामला दर्ज करा दिया है। याचियों ने संयुक्त हलफनामा दाखिल कर यह गंभीर आशंका जताई कि उन्हें ऑनर किलिंग यानी सम्मान के नाम पर हत्या का शिकार बनाया जा सकता है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल दंपति को अंतरिम राहत प्रदान की, बल्कि उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए महिला के परिवार को निर्देश दिया है कि वे दंपति को किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक क्षति न पहुंचाएं। कोर्ट ने परिवार को स्पष्ट हिदायत दी कि वे न तो दंपति के घर में प्रवेश करें और न ही उनसे सीधे तौर पर या किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (फोन, सोशल मीडिया आदि) से संपर्क करने की कोशिश करें। इसके साथ ही, अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया गया है कि वे व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करें कि इस नवविवाहित जोड़े को किसी भी प्रकार का खतरा न हो। इस मामले की अगली सुनवाई अब 8 अप्रैल को तय की गई है। एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने अंतरधार्मिक लिव-इन संबंधों पर भी बड़ी टिप्पणी की। अदालत ने अलग-अलग धर्मों के युवक-युवती द्वारा दायर सुरक्षा याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि भारत के किसी भी कानून के तहत अंतरधार्मिक लिव-इन संबंध अपराध या निषिद्ध नहीं हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों से किसी को भी महज इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे अलग धर्मों से ताल्लुक रखते हैं। न्यायाधीश ने कहा कि जाति, पंथ, लिंग या धर्म के आधार पर भेदभाव की देश के कानून में कोई जगह नहीं है। सोनभद्र के एक मुस्लिम युवक और उसकी हिंदू साथी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस को उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस/31मार्च2026