लेख
31-Mar-2026
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1 अप्रैल हनुमान जयंती) आज जब चैत्र मास की पूर्णिमा का चंद्रमा अपनी पूरी आभा के साथ आकाश में उदित होगा, तो धरती पर एक ऐसी ऊर्जा का संचार होगा जो सदियों से भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसी है। यह दिन केवल एक कैलेंडर की तिथि नहीं है, बल्कि उस महाशक्ति के अवतरण का उत्सव है जिसे हम हनुमान कहते हैं। हनुमान जी का व्यक्तित्व किसी परिचय का मोहताज नहीं है; वे घर-घर के रक्षक, संकटों के नाशक और हर व्याकुल हृदय के परम साथी हैं। उनकी महिमा का गान जितना सरल है, उनका जीवन दर्शन उतना ही गहरा और प्रेरणादायी है। उनकी सबसे बड़ी सुंदरता उनकी निस्वार्थ भक्ति में छिपी है। उन्होंने दुनिया को सिखाया कि ईश्वर को पाने के लिए किसी कठिन आडंबर की नहीं, बल्कि निर्मल मन और पूर्ण समर्पण की आवश्यकता होती है। एक ओर जहाँ उनके पास लंका को भस्म करने और समुद्र को एक छलांग में लांघने की असीम शक्ति थी, वहीं दूसरी ओर वे प्रभु राम के चरणों में एक अबोध बालक की भांति विनत रहते थे। उनकी शक्ति में कोई अहंकार नहीं था और उनकी विनम्रता में कोई कमजोरी नहीं थी। जब उनसे उनकी अद्भुत सामर्थ्य का रहस्य पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी सहजता से कहा कि जो कुछ भी है, वह केवल राम नाम की महिमा है। यह शून्य हो जाने का भाव ही उन्हें ब्रह्मांड का सबसे बड़ा भक्त बनाता है। अक्सर हम शक्ति को अधिकार और अधिपत्य से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हनुमान जी ने शक्ति की परिभाषा ही बदल दी। उनके पास अष्ट सिद्धि और नव निधि का वरदान था, जिससे वे सूक्ष्म से सूक्ष्म और विशाल से विशाल रूप धर सकते थे, किंतु उन्होंने इस सामर्थ्य का उपयोग केवल जनकल्याण और प्रभु काज के लिए किया। यह संयम आज के नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी सीख है कि शक्ति जितनी अधिक हो, विनम्रता उतनी ही गहरी होनी चाहिए। जब हम सुंदरकांड के प्रसंगों को पढ़ते हैं, तो पाते हैं कि हनुमान जी केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि एक चतुर कूटनीतिज्ञ और संवाद के ज्ञाता भी थे। लंका में विभीषण को अपनी ओर मिलाना हो या रावण की सभा में निर्भीकता से अपनी बात रखना, उनकी वाकपटुता बेमिसाल थी। वे सिखाते हैं कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धैर्य नहीं खोना चाहिए और शत्रु के घर में भी मित्र ढूँढने की दृष्टि रखनी चाहिए। आज के प्रतिस्पर्धी युग में, जहाँ छोटी-छोटी असफलताओं पर लोग टूट जाते हैं, हनुमान जी का अटूट आत्मविश्वास एक संजीवनी की तरह काम करता है। उनका चरित्र हमें टीम वर्क और समर्पण की अनूठी शिक्षा देता है। लंका विजय के महाभियान में उन्होंने कभी भी श्रेय लेने की कोशिश नहीं की। जब भगवान राम ने उन्हें गले लगाया और भरत के समान प्रिय कहा, तब भी वे हाथ जोड़कर चरणों में ही बैठे रहे। यह दर्शाता है कि सच्चा सेवक वही है जो परिणाम की चिंता किए बिना अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे और सफलता का श्रेय अपने आराध्य को सौंप दे। आज के इस भागदौड़ भरे युग में हनुमान जी एक मैनेजमेंट गुरु की तरह नजर आते हैं। लक्ष्य कितना भी बड़ा क्यों न हो, मार्ग में कितनी भी बाधाएँ क्यों न आएं, हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि बुद्धि और पराक्रम के सही संतुलन से हर मुश्किल को जीता जा सकता है। लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए पूरी पहाड़ी उठा लाना यह दर्शाता है कि जब अपनों पर संकट आए, तो असंभव शब्द डिक्शनरी से बाहर कर देना चाहिए। वे युवाओं के लिए एकाग्रता और अनुशासन के जीते-जागते उदाहरण हैं। उनकी लंगोट का त्याग और सिंदूरी चोला हमें सादगी और सात्विकता का मार्ग दिखाता है। हनुमान जयंती मनाना केवल मंदिरों में चोला चढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आज के दौर में जब समाज में स्वार्थ बढ़ रहा है, तब हनुमान जी का सेवा परमो धर्म का संदेश एक प्रकाश स्तंभ की तरह है। हनुमान जी एक ऐसी वैश्विक चेतना हैं जो सीमाओं और मजहबों से परे है। दुनिया के कई देशों में उन्हें अलग-अलग नामों से पूजा जाता है, क्योंकि संकट हर इंसान के जीवन में आता है और हर इंसान को एक संकटमोचन की तलाश होती है। वे भय से मुक्ति का मार्ग हैं। जब हम नासै रोग हरै सब पीरा का जाप करते हैं, तो वह केवल शब्द नहीं होते, बल्कि एक अटूट विश्वास होता है जो हमारी कोशिकाओं में नई ऊर्जा भर देता है। हनुमान जी का नाम ही पर्याप्त है मन के हर संशय और दुर्बलता को मिटाने के लिए। जैसे-जैसे आज का दिन चढ़ेगा, हर ओर जय सिया राम के उद्घोष गूंजेंगे। लेकिन सच्ची पूजा तब होगी, जब हम उनके साहस को अपने आचरण में और उनकी करुणा को अपने व्यवहार में उतारेंगे। हनुमान जी चिरंजीवी हैं, वे कल भी थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे। वे हर उस व्यक्ति के साथ हैं जो धर्म और सत्य की राह पर अडिग है। (लेखक पत्रकार हैं ) .../ 31 मार्च /2026