राष्ट्रीय
31-Mar-2026
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-राहुल गांधी ने स्मार्ट सिटी मिशन को लेकर मोदी सरकार को घेरा नई दिल्ली,(ईएमएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि बड़ी-बड़ी घोषणाएं करना और फिर जवाबदेही तय किए बिना ही उनका बढ़-चढ़कर प्रचार करना इस सरकार की कार्यशैली का हिस्सा है। यहां राहुल गांधी ने विशेष रूप से स्मार्ट सिटी मिशन का जिक्र किया और इसे इसी शैली का उदाहरण बताया। सांसद राहुल गांधी ने कहा कि कोई भी शहर स्मार्ट नहीं हो सकता अगर वह अपने नागरिकों को बुनियादी गरिमा आवश्यकताएं (साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा) प्रदान नहीं कर पाता। उन्होंने लोकसभा में सरकार से पूछे गए प्रश्नों के आधार पर दावा किया कि स्मार्ट सिटी मिशन धोखे के अलावा कुछ नहीं है और इसका उद्देश्य पूरे शहर का विकास करना कभी नहीं था। राहुल गांधी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा, सिर्फ बताया गया कि लगभग 48,000 करोड़ रुपये खर्च हुए और 97 प्रतिशत प्रोजेक्ट पूरे बता दिए गए, लेकिन वास्तविकता में शहरों में दूषित पानी, खुले सीवर, गिरते पुल और धंसती सड़कें मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना मोदी सरकार की असली कार्यशैली का उदाहरण है – घोषणाएं बड़ी, प्रचार उससे बड़ा और जवाबदेही शून्य। उन्होंने कहा आपको मोदी सरकार का स्मार्ट सिटी मिशन याद होगा, जिसके तारीफों के पुल बांधते पीएम थकते नहीं थे। अब जबकि यह योजना अपने समापन की ओर अग्रसर है तब मैंने संसद में सरकार से इसके वास्तविक परिणामों का हिसाब मांगा। बतौर जवाब जो सच सामने आया उसे धोखे के अतिरिक्त कुछ और कहा नहीं नहीं जा सकता है, इस योजना का उद्देश्य कभी भी पूरे शहर का विकास करना था ही नहीं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एक आधी-अधूरी योजना को पूरे बदलाव की कहानी बनाकर पूरे देश को बेचा गया। उन्होंने कहा, हमने सवाल किए कि कैसे होते हैं स्मार्ट शहर, सफलता किस आधार पर तय हुई, कितने शहर वाकई बदले, इससे लोगों के जीवन में क्या ठोस बदलाव आए? इनका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसी के साथ ही उन्होंने कहा, जवाब में सिर्फ यह बताया गया की करीब 48,000 करोड़ रुपये खर्च हुए, और 97 प्रतिशत प्रोजेक्ट पूरे बता दिए, लेकिन अगर सब पूरा है, तो आपके शहर में क्या बदला? यहां राहुल दावा करते हैं कि जमीनी हकीकत इससे अलग कहानी कहती है, दूषित पानी और खुले सीवर से मौतें हो रही हैं, पुल गिर रहे और सड़कें धंस रहीं ये घटनाएं भी विफलता को उजागर करती हैं। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा, कि दरअसल योजना मोदी सरकार की असली कार्यशैली का उदाहरण पेश करती है, घोषणाएं बड़ी, प्रचार उससे और बड़ा, और जवाबदेही शून्य। यहां बताते चलें कि संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने बताया था, कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 शहरों के लिए कुल 48,000 करोड़ रुपये में से 98 प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय सहायता का उपयोग किया जा चुका है। मंत्री ने बताया कि 8,064 परियोजनाओं में से 97 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिशन का उद्देश्य पूरे शहर का विकास नहीं बल्कि क्षेत्र-आधारित टिकाऊ और तकनीकी समाधानों के माध्यम से प्रतिकृति योग्य मॉडल तैयार करना था। स्मार्ट सिटी मिशन भारत सरकार की ओर से 25 जून 2015 को शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य 100 शहरों को टिकाऊ, नागरिक-अनुकूल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाना है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन ने शहरी जरूरतों के लिए प्रासंगिक समाधान पेश किए हैं और राष्ट्रीय विकास एजेंडे और एसडीजी के अनुरूप कार्य किया है। हिदायत/ईएमएस 31मार्च26