राष्ट्रीय
31-Mar-2026


-वैश्विक व्यापार संधि की बैठक में नहीं हुआ समझौता -भारत सरकार लगाएगी शुल्क, सरकार को 4700 करोड़ का नुकसान -डिजिटल सर्विस भारत में होंगी महंगी मुंबई,(ईएमएस)। जिनेवा में हुई वैश्विक व्यापार संधि से जुड़ी बैठक में सदस्य देशों के बीच डिजिटल सेवाओं पर शुल्क को लेकर सहमति नहीं बन सकी। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के तहत पिछले 28 वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क नहीं लगाने की व्यवस्था लागू थी, लेकिन इस बार इसे आगे बढ़ाने पर आम राय नहीं बन पाई। ऐसे में अब सदस्य देशों को डिजिटल सेवाओं पर शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। इस फैसले का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ने की संभावना है। यदि भारत सरकार डिजिटल सेवाओं पर सीमा शुल्क लागू करती है, तो नेटफ्लिक्स, स्पॉटिफाई, ऑनलाइन गेम डाउनलोड, सॉफ्टवेयर और अन्य स्ट्रीमिंग सेवाएं महंगी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अब तक इस व्यवस्था के कारण सालाना करीब 4,700 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो रहा था। शुल्क लगाने से यह राजस्व वसूला जा सकेगा। हालांकि, डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियां अतिरिक्त कर या शुल्क का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, जिससे आम लोगों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। मनोरंजन, गेमिंग और सॉफ्टवेयर सेवाओं का खर्च बढ़ने की आशंका है। सरकार का मानना है कि तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजार में समान कर व्यवस्था जरूरी है, ताकि घरेलू और विदेशी कंपनियों के बीच संतुलन बना रहे। अब सभी की नजर इस पर है कि भारत डिजिटल सेवाओं पर कब और कितना शुल्क तय करता है, क्योंकि इसका सीधा असर करोड़ों इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। नंदिनी परसाई/ 31 मार्च 2026