क्षेत्रीय
31-Mar-2026
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- मेडिकल अफसर की याचिका ख़ारिज जबलपुर, (ईएमएस)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि रिश्वत सिर्फ लेना ही नहीं, बल्कि मांगना भी अपराध है। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने टीकमगढ़ के एक मेडिकल ऑफिसर की एफआईआर रद्द करने की मांग से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया। टीकमगढ़ जिले के बल्देवगढ़ में पदस्थ ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकित त्रिपाठी की ओर से यह याचिका दायर की गई। उन पर आरोप है कि खड़गपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में आधार कार्ड केंद्र का संचालन करने के लिए उसने रिश्वत के रूप में हर माह 10 हजार रुपए की डिमांड रखी थी। आधार केंद्र संचालक की शिकायत पर लोकायुक्त द्वारा एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसे रद्द करने हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल की गई थी। मेडिकल ऑफिसर की ओर से कोर्ट में कहा गया कि शिकायतकर्ता को कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई थी और अब लोकायुक्त स्तर पर मामला बंद करने की प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अभिषेक श्रीवास्तव ने याचिकाकर्ता की ओर से दी गईं दलीलों का विरोध किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया। डिवीज़न बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि संशोधित कानून के तहत यह जरूरी नहीं कि रिश्वत ली गई हो। रिश्वत की मांग करना ही अपराध है। शिकायतकर्ता का अधिकार पूरी तरह वैध है। ऐसे में याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। सुनील साहू / मोनिका / 31 मार्च 2026/ 5.57