व्यापार
31-Mar-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। मंगलवार को जारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार 10 महीने से अधिक के आयात के बराबर है और छोट अवधि का ऋण विदेशी मुद्रा भंडार के 20 प्रतिशत के बराबर है, जिससे रुपए को सहारा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को पर्याप्त जगह मिलती है। हालांकि, रिसर्च फर्म ने चेतावनी दी कि अस्थिर पूंजी प्रवाह और तेल की ऊंची कीमतें निकट भविष्य के दृष्टिकोण के लिए जोखिम पैदा करती हैं और तेल विपणन कंपनियों के लिए 250-300 मिलियन डॉलर की दैनिक मांग को पूरा करने के लिए एक विशेष डॉलर विंडो सहित कई नीतिगत उपायों का आग्रह किया। रिपोर्ट में कहा गया, इससे वास्तविक विदेशी मुद्रा की मांग और आपूर्ति की गतिशीलता पर बेहतर स्पष्टता प्राप्त होगी और अनावश्यक अस्थिरता को रोकने के लिए नियामक द्वारा शुरू किए गए विभिन्न उपायों की प्रभावशीलता को मापने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि केवल ट्रेडिंग बुक पर 100 मिलियन डॉलर की सीमा लगाई जानी चाहिए, न कि पूरे बैंक बुक स्तर पर, क्योंकि इससे परिचालन संबंधी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। इसमें अल्पकालिक यील्ड बढ़ाने और दीर्घकालिक यील्ड घटाने के लिए ऑपरेशन ट्विस्ट का सुझाव दिया गया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि विभिन्न संदर्भ दरें निर्धारित सीमा के भीतर रहें और नीतिगत दर के अनुरूप हों। केंद्रीय बैंक ने रुपए को सहारा देने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन फर्म ने बाहरी बाजारों से मांग वाली मुद्राओं को लाकर और वैकल्पिक तंत्रों (जैसे ओएमसी के लिए एक विशेष यूएसडी विंडो) को शामिल करके हस्तक्षेपों में तेजी लाने का आग्रह किया है, क्योंकि रुपए में गिरावट देश के मैक्रो फंडामेंटल्स से काफी अधिक है। सुबोध/३१-०३-२०२६