नई दिल्ली (ईएमएस)। ईरान का इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष जारी है। इस संघर्ष में ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही भी शामिल हो गए हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के बाधित होने के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट पहले ही गहरा चुका है। अब एक और खतरा स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब पर मंडरा रहा है, जो रेड सी और अदन की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण चोक प्वाइंट है। इसी कारण भारतीय नौसेना पूरी तरह सतर्क है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस समय उत्तरी अरब सागर में ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के आसपास भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत तैनात हैं। एंटी-पायरेसी मिशन के तहत यहां हमेशा एक युद्धपोत मौजूद रहता है। वेस्ट एशिया संकट के दौरान भारतीय नौसेना लगातार भारतीय कच्चे तेल और एलपीजी टैंकरों को एस्कॉर्ट कर रही है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक आवश्यकता पड़ने पर यहां भी भारतीय ध्वज वाले जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा भी दी जा सकती है। फिलहाल हूतियों ने रेड सी में किसी जहाज पर हमला नहीं किया है, लेकिन भविष्य में ऐसा नहीं होगा, यह कहना मुश्किल है। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब को भी बाधित कर सकता है। वर्ष 2023–24 में जब रेड सी क्षेत्र में हूती हमले शुरू हुए थे, तब दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग को जोखिमपूर्ण घोषित कर दिया था। बाब-अल-मंदेब लगभग 20 मील चौड़ा है, और यह रेड सी को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यहां से करीब 12 प्रतिशत वैश्विक व्यापार गुजरता है। वर्तमान में ईरान दबाव में हूती उसकी मदद के लिए इस मार्ग को भी वेपोनाइज करने की कोशिश कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो वैश्विक व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जिसमें भारत भी शामिल है—महंगाई बढ़ सकती है, उर्वरकों की कीमतें बढ़ सकती हैं, और निर्यात प्रभावित हो सकता है। सुबोध/३१-०३-२०२६