अंतर्राष्ट्रीय
01-Apr-2026


बोले- जंग खत्म करने के लिए किसी समझौते की जरूरत नहीं डील हो या न हो, युद्ध खत्म दो से तीन हफ्तों में अमेरिका छोड़ेगा ईरान -इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान से सहमत नहीं -ईरान जंग के बाद नाटो से अलग हो सकता है अमेरिका, ट्रंप ने बताया कागजी शेर वाशिंगटन/तेहरान/तेलअवीव(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में जंग जारी है। इजराइल और ईरान एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। इस बीच खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले के बाद ईरान अब यूएस की टेक कंपनियों को निशाना बनाने की प्लानिंग कर रहा है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गाड्र्स ने अमेरिका की 18 कंपनियों पर हमले की चेतावनी दी, जिसमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट भी शामिल है। ईरान की इस धमकी ने अब कॉर्पोरेट ठिकानों को भी असुरक्षित कर दिया है। वहीं इस धमकी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका जल्द ही ईरान से अपनी सेना वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। ट्रंप ने साफ किया कि इस जंग को खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान छोडऩे की तैयारी करेगी। वहीं नाटो के खिलाफ ईरान जंग में ट्रंप लगातार मुखर थे, लेकिन पहली बार उन्होंने इस संगठन से निकलने के लिए गंभीर समीक्षा करने की बात कही है। ट्रंप ने नाटो को कागजी शेर बताया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान जंग के बाद नाटो के भविष्य पर फैसला होगा। नाटो के खिलाफ ईरान जंग में ट्रंप लगातार मुखर थे, लेकिन पहली बार उन्होंने इस संगठन से निकलने के लिए गंभीर समीक्षा करने की बात कही है। ट्रंप ने नाटो को कागजी शेर बताया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान जंग के बाद नाटो के भविष्य पर फैसला होगा। ट्रंप के मुताबिक, ईरान में जिन सैन्य लक्ष्यों को अमेरिका ने तय किया था, वे अब पूरे हो चुके हैं। इसलिए अमेरिका इस संघर्ष को लंबा खींचना नहीं चाहता। वहीं, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अभी तक युद्ध खत्म करने को लेकर कोई समयसीमा तय नहीं की है। उन्होंने कहा है कि फिलहाल इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। जानकारी के लिए बता दें कि इस साल 28 फरवरी को ईरान पर बड़े स्तर पर हमला किया गया था। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी। साथ ही उनकी बेटी और दामाद समेत कई अन्य लोगों के मारे जाने की भी सूचना थी। इसके बाद से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर लगातार बमबारी की गई। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी खाड़ी देशों को निशाने पर लिया। नाटो कागजी शेर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे नाटो से बाहर निकलने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने नाटो को कागजी शेर बताया। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि वे पहले से ही नाटो से ज्यादा प्रभावित नहीं थे और उन्हें लगता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी यही मानते हैं। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका हमेशा अपने साथियों के लिए खड़ा रहा है, लेकिन इस बार कोई भी अमेरिका के साथ नहीं आया। उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अमेरिका ने मदद की थी, लेकिन अब वही समर्थन अमेरिका को नहीं मिल रहा। यह बयान तब आया है जब नाटो देशों ने ईरान जंग में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया। अमेरिका चाहता था कि नाटो देश होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए अपने वॉरशिप भेजें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) ने कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक यह संघर्ष अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा संकट बन गया है। विनोद उपाध्याय / 01 अप्रैल, 2026