ज़रा हटके
02-Apr-2026
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अबू धाबी,(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच खाड़ी क्षेत्र की भू-राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में विश्वास जताया है कि यह युद्ध आगामी दो से तीन सप्ताह के भीतर समाप्त हो जाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत और बढ़ते तनाव को देखते हुए यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने और अमेरिका के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई करने पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, यूएई अब अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने के लिए एक बड़े सैन्य अभियान की योजना बना रहा है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है, जिसे ईरान के हस्तक्षेप के कारण वर्तमान में भारी खतरों का सामना करना पड़ रहा है। ईरान द्वारा यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर लगातार किए जा रहे हमलों ने अबू धाबी को अपनी पुरानी तटस्थता और मध्यस्थता की नीति छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। यदि यूएई इस युद्ध में सक्रिय रूप से उतरता है, तो वह इस संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने वाला पहला खाड़ी देश बन जाएगा। यूएई वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव लाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई को वैधानिक मंजूरी मिल सके। इसके साथ ही उसने अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों से एक वैश्विक गठबंधन बनाने की अपील की है। हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन जैसे देश सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव पर वीटो कर सकते हैं। इसके बावजूद, यूएई ने संकेत दिए हैं कि वह संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के बिना भी सैन्य सहयोग के लिए तैयार है, जिसमें समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना और रसद सहायता (लॉजिस्टिक सपोर्ट) शामिल है। यूएई ने अमेरिका को यह भी सुझाव दिया है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य के उन द्वीपों पर नियंत्रण स्थापित करे, जो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इनमें अबू मूसा द्वीप प्रमुख है, जिस पर दशकों से ईरान का कब्जा है लेकिन यूएई उस पर अपना ऐतिहासिक दावा करता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई की मजबूत सैन्य क्षमता, आधुनिक सर्विलांस ड्रोन और जेबेल अली जैसे विशाल बंदरगाह अमेरिका के नेतृत्व वाले इस अभियान में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। नाटो देशों के पीछे हटने के बाद, खाड़ी क्षेत्र से यूएई और बहरीन जैसे देशों का समर्थन राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ी राहत और सामरिक मजबूती लेकर आया है। यूएई की यह सक्रियता न केवल अमेरिका के सैन्य लक्ष्यों में सहायक होगी, बल्कि इजरायली सेनाओं को आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने में भी मदद कर सकती है। वीरेंद्र/ईएमएस 02 अप्रैल 2026