तेहरान,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के पांचवें सप्ताह में प्रवेश करते ही तनाव एक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक सनसनीखेज बयान जारी कर अमेरिका की 18 प्रमुख दिग्गज कंपनियों को सीधे तौर पर निशाना बनाने की धमकी दी है। इस सूची में एपल, गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, टेस्ला, बोइंग और जेपी मॉर्गन जैसे बड़े वैश्विक नाम शामिल हैं। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी क्षमताओं का उपयोग कर अमेरिका और इजरायल को ईरानी नेताओं की जासूसी और टारगेट ट्रैकिंग में मदद कर रही हैं। आईआरजीसी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरानी नेताओं की लक्षित हत्याएं बंद नहीं हुईं, तो इन कंपनियों के क्षेत्रीय कार्यालयों और संपत्तियों को नष्ट कर दिया जाएगा। बयान में एक समय सीमा निर्धारित करते हुए कहा गया है कि संबंधित कंपनियों के कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए तुरंत दफ्तर छोड़ दें, क्योंकि तेहरान समय के अनुसार शाम 8 बजे के बाद किसी भी हत्या के बदले इन यूनिट्स पर हमला किया जा सकता है। यह खतरा विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और कतर जैसे देशों के लिए बड़ा है, जहां इन कंपनियों के बड़े डेटा सेंटर, शोरूम और सर्विस सेंटर स्थित हैं। अकेले टेस्ला के खाड़ी देशों में मौजूद 30 से अधिक सुपरचार्जर स्टेशन भी इस जद में आ सकते हैं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईंधन की कमी का सामना कर रहे देशों को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि वे अपनी सुरक्षा खुद करें और अपना तेल खुद हासिल करने की हिम्मत जुटाएं। वहीं, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने आने वाले दिनों को युद्ध के लिए निर्णायक बताया है। उन्होंने संकेत दिया कि कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सैन्य तैनाती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ईरान की इस नई धमकी ने न केवल युद्ध के दायरे को बढ़ा दिया है, बल्कि अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र के लिए भी गंभीर सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर दी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 02 अप्रैल 2026