वॉशिंगटन(ईएमएस)। नासा के वैज्ञानिकों ने आज अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। नासा ने 2 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस 2 मिशन की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग कर दी है। भारतीय समयानुसार सुबह 3:54 बजे विशालकाय स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट ने गर्जना के साथ अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरी। यह वर्ष 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद पहला अवसर है, जब इंसान एक बार फिर चंद्रमा की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। लॉन्च पूरी तरह सफल रहा और मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गए हैं, जहां से वे अब चंद्रमा की ओर बढ़ रहे हैं। चंद्रमा के पास पहुंचना: यात्रा शुरू होने के लगभग चौथे दिन (6 अप्रैल) वे चंद्रमा के सबसे करीब होंगे। वे चंद्रमा की सतह से करीब 7,600 से 8,000 किलोमीटर की दूरी से गुजरेंगे। चूंकि यह एक फ्लाईबाई मिशन है (यानी वे चांद पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसके पीछे से चक्कर लगाकर लौटेंगे) वे 6 अप्रैल को चांद का चक्कर लगाने के बाद वापस पृथ्वी की ओर मुड़ जाएंगे। लगभग 10 दिनों की इस पूरी यात्रा के बाद, 11 अप्रैल 2026 (भारतीय समयानुसार) को उनका कैप्सूल प्रशांत महासागर में उतरेगा। इस ऐतिहासिक यात्रा का नेतृत्व मिशन कमांडर रीड वाइसमैन कर रहे हैं। उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर हैं, जो चांद के करीब जाने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। मिशन स्पेशलिस्ट के रूप में क्रिस्टीना कोच, चांद मिशन पर जाने वाली पहली महिला और जेरेमी हैनसेन, चांद की ओर जाने वाले पहले कनाडाई अंतरिक्ष यात्री के रूप में इतिहास का हिस्सा बने हैं। ये चारों अनुभवी सदस्य ओरियन कैप्सूल में सवार होकर लगभग 10 दिनों की चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी करेंगे।आर्टेमिस 2 एक परीक्षण मिशन है, जिसके तहत ओरियन कैप्सूल चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएगा। यात्री चंद्रमा की सतह से लगभग 9,600 किलोमीटर की दूरी तक पहुंचेंगे। इस 10 दिवसीय यात्रा के दौरान नासा ओरियन कैप्सूल की जीवन रक्षा प्रणाली, संचार, नेविगेशन और गहरे अंतरिक्ष में काम करने की क्षमता की बारीकी से जांच करेगा। वापसी के समय कैप्सूल 40,000 किलोमीटर प्रति घंटा की तीव्र गति से वायुमंडल में प्रवेश कर प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग करेगा। यह मिशन केवल चांद तक लौटने का प्रयास नहीं है, बल्कि भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाने और वहां से मंगल ग्रह तक मानव को पहुंचाने की दिशा में एक निर्णायक नींव है। पूरी दुनिया की निगाहें अब इन चारों नायकों की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/02अप्रैल2026