वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नाटो देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच सहयोगी देशों के असहयोग से नाराज ट्रंप ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन को दी जाने वाली हथियारों की सप्लाई रोकने की योजना बना रहे हैं। बीते चार वर्षों से रूस के साथ युद्ध झेल रहा यूक्रेन अब ईरान संकट की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। दरअसल, ट्रंप की इस नाराजगी की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग के बाद ईरान ने इस प्रमुख जलमार्ग को बाधित कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रंप ने इस रास्ते को बलपूर्वक खुलवाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे प्रमुख नाटो देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, इन देशों ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से भी मना कर दिया है। पश्चिमी देशों को झुकने पर मजबूर करने के लिए ट्रंप अब यूक्रेन कार्ड खेल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि नाटो देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका का साथ नहीं देते, तो वह यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता पर रोक लगा देंगे। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा होता है, तो रूस के खिलाफ यूक्रेन की स्थिति बेहद कमजोर हो जाएगी। ट्रंप ने अपने हालिया बयानों में नाटो की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे एक पेपर टाइगर (कागजी शेर) करार देते हुए कहा कि वह इस संगठन से अमेरिका को अलग करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी कानून के अनुसार नाटो से हटने के लिए सीनेट में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो ट्रंप के लिए एक बड़ी चुनौती है। फिलहाल, ट्रंप के इस कड़े रुख ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है। वीरेंद्र/ईएमएस/02अप्रैल2026