मुंबई, (ईएमएस)। कहावत है कानून के हाथ लंबे होते हैं और इस कहावत को चरितार्थ किया है मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच और ट्रॉम्बे पुलिस ने। दरअसल पुलिस ने एक ऐसे अपराधी को गिरफ्तार किया है जो पिछले 45 वर्षों से पुलिस को चकमा दे रहा था। खबर कि ट्रॉम्बे पुलिस में 1981 में दर्ज हत्या की कोशिश के एक मामले में पुलिस ने 72 साल के पोपट गोविंद वायदंडे को सांगली जिले के कडेगांव तालुका सेगिरफ्तार किया है। इस केस की खास बात यह है कि पुलिस के पास आरोपी का कोई फोटो, मोबाइल नंबर या डिजिटल सबूत नहीं था। यह सर्च सिर्फ ह्यूमन इंटेलिजेंस और पुराने डॉक्यूमेंट्स में मिले हल्के निशानों के आधार पर पूरी की गई। कोर्ट से सेक्शन 82 के तहत प्रोक्लेमेशन जारी होने के बाद इस केस की फाइलें फिर से खोली गईं। जाँच के दौरान, पुलिस को गोवंडी में एक मृत व्यक्ति के रिश्तेदार से आरोपी के संभावित घर के बारे में जानकारी मिली। जब पीएसआई शरद नाणेकर की टीम ने पुरानी फाइलें खंगालीं, तो उन्हें एक पुराने दोस्त का पता मिला। हालांकि दोस्त ज़िंदा नहीं था, लेकिन उसके रिश्तेदारों की एक छोटी सी टिप से पुलिस सतारा ज़िले के शेनोली पहुँची। वहाँ वायदंडे की पत्नी मिली। उसने उसके शराब की लत और मारपीट की वजह से उससे रिश्ता तोड़ लिया था, लेकिन उसने जो जानकारी दी, उससे पुलिस को एक सुराग मिला। आरोपी पोपट वायदंडे अपनी पहचान छिपाने में बहुत सावधान रहता था। वह कभी भी एक जगह पर छह महीने से ज़्यादा नहीं रहता था। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए एक नकली नाम का इस्तेमाल किया था। सतारा और सांगली जिले की सीमा पर उसे ढूँढते हुए, पुलिस को उसकी पूर्व पत्नी बेगम शेनोली रेलवे स्टेशन के पास एक झोपड़ी में मिली। उसकी बेटी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, पुलिस सांगली के लिए निकल पड़ी। आखिर में, पुलिस ने उसे आंबेगांव (तालुका कडेगांव) में एक खेत में काम करते हुए गिरफ्तार कर लिया। उसके पास मौजूद पुराने वोटर आईडी कार्ड से उसकी पहचान सुनिश्चित हुई। इस बीच, पोपट वायदंडे सिर्फ़ एक जुर्म तक ही सीमित नहीं था। उसके खिलाफ पूरे महाराष्ट्र में 9 से ज़्यादा गंभीर केस दर्ज हैं। 1981 में उसे मुंबई से तड़ीपार भी कर दिया गया था। वह बहुत चालाकी से अपनी पहचान छिपाता था। कभी गैराज में तो कभी खेतों में मजदूरी करता हुआ यह आरोपी कभी भी 6 महीने से ज़्यादा एक जगह नहीं रुकता था। आखिर में पुलिस ने उसे तब गिरफ्तार किया जब वह सांगली में एक खेत में काम करने के बाद आराम कर रहा था। बहरहाल मुंबई पुलिस द्वारा 45 साल बाद बिना किसी ठोस पहचान के एक अपराधी को गिरफ्तार करने पर हर जगह मुंबई पुलिस की तारीफ़ हो रही है। संजय/संतोष झा-०२ अप्रैल/२०२६/ईएमएस