लंदन (ईएमएस)। हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक तनाव तेजी से बढ़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल सप्लाई का एक अहम केंद्र है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बनाया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि इसके बंद होने की आशंका से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने हालिया सैन्य घटनाओं के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है और केवल उन्हीं देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति हैं, जिनके साथ उसके संबंध ठीक हैं। इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए यह मार्ग करीब-करीब बंद हो गया है। इसकारण वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल और सप्लाई चेन में बाधा आ सकती है। इस बीच यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए करीब 35 देशों की बैठक बुलाने का फैसला किया है। इस सम्मेलन का उद्देश्य किसी भी तरह जलमार्ग को सुरक्षित और चालू रखना है। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि वह सीधे युद्ध में शामिल नहीं होगा, लेकिन कूटनीतिक और राजनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान खोजेगा। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपने सहयोगियों, खासकर नाटो देशों पर दबाव बना रहे हैं कि वे इस संघर्ष में अमेरिका का साथ दें और अपनी नौसेना भेजकर इस मार्ग को खुलवाने में मदद करें। हालांकि नाटो के कई देशों ने इस सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी है, जिससे अमेरिका की रणनीति को झटका लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट अब केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया है, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक चुनौती बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास ही इस संकट को टालने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2026