-बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट को लेकर इलाके में लगातार बढ़ रहा तनाव कोलकाता,(ईएएमस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हाई प्रोफाइल सीट भवानीपुर में बीजेपी उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी के नामांकन को खास बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद मौजूद थे। अमित शाह का नामांकन में शामिल होना यह दर्शाता है कि बीजेपी इस चुनाव को सीधे ममता बनाम शुवेंदु के मुकाबले के रूप में पेश करना चाहती है। उधर, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर से नामांकन दाखिल करेंगे। अधीर रंजन चौधरी के नॉमिनेशन में किसी बड़े कांग्रेस नेता के शामिल होने की सूचना नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के मालदा में विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जहां उग्र भीड़ ने न्यायाधीशों के काफिले को निशाना बनाया। पत्थरबाजी के दौरान करीब 100 वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सात न्यायिक अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने देर रात सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें पुलिस के सुरक्षा घेरे के बावजूद काफिले पर हमले की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। उपद्रवियों ने बांस की लाठियां फेंककर गाड़ियों को रोकने का प्रयास किया और ईंट-पत्थरों से खिड़कियां तोड़ दीं। वाहनों के अंदर कांच के टुकड़े भी मिले हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने पूरी घटना की रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट के मुताबिक सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट को लेकर इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक अब तक करीब 22 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं, जिसके विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए। बुधवार से मालदा के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हुए। इसी दौरान कालियाचक में सात न्यायिक अधिकारियों को घेर लिए जाने की सूचना मिली, जिसे हाईकोर्ट और चुनाव आयोग तक पहुंचाया गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस टीम आधी रात को मौके पर पहुंची और अधिकारियों को छुड़ाकर सुरक्षित स्थान तक ले गई, लेकिन इसके बाद भी इलाके में तनाव बना रहा1 चुनाव आयोग का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे एसआईआर ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं, जहां उनकी पात्रता पर फैसला होगा। आयोग ने इस प्रक्रिया को गुरुवार से शुरू करने की बात कही, लेकिन अब तक यह शुरू नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के सवालों पर स्पष्ट जवाब न मिलने से असंतोष है, जिसके चलते बैठक भी टाल दी गई है। ऐसे माहौल में न्यायिक अधिकारियों पर हुआ हमला बेहद गंभीर माना जा रहा है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। बीजेपी सांसद सुकांत मजूमदार ने इसे साजिश करार देते हुए कहा कि न्यायाधीशों को बंधक बनाने और काफिले को रोकने की कोशिश की गई, यहां तक कि महिला न्यायाधीशों के साथ दुर्व्यवहार की कोशिश भी हुई। वहीं, टीएमसी नेता कुणाल घोष ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि इसके लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है, जिसकी नीतियों के कारण ऐसी स्थिति बनी। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल सरकार की इस आशंका के उलट इस महीने के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने से पहले, वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए हटाए गए वोटरों के दावों की जांच पूरी नहीं हो पाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने बताया है कि करीब 60 लाख दावों पर 7 अप्रैल तक फैसला कर लिया जाएगा। सिराज/ईएमएस 02अप्रैल26