अमरावती (ईएमएस)। आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव 2024 को लेकर हाल ही में उठे विवाद ने सियासी और सार्वजनिक ध्यान खींचा है। दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता में अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई.कुरैशी ने चुनाव आयोग के आंकड़ों में असामान्य पैटर्न की ओर इशारा किया। प्रभाकर का दावा है कि 3,500 बूथों पर रात 2 बजे तक वोटिंग चलती रही और कुल वोटों का लगभग 4.16 प्रतिशत रात 11.45 बजे से 2 बजे के बीच डाला गया। उन्होंने बताया कि आधी रात के बाद हर 20 सेकंड में एक वोट दर्ज हुआ, जबकि ईवीएम को रीसेट होने में 14 सेकंड लगते हैं। चुनाव में चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी-नेतृत्व वाली एनडीए ने निर्णायक जीत हासिल की, जिसमें 175 सीटों में से 164 जीत दर्ज की गई। टीडीपी को 135 सीटें मिलीं, बीजेपी को आठ और पवन कल्याण की जन सेना को 21 सीटें मिलीं। मतदान प्रतिशत को लेकर भी विवाद है। 13 मई को शाम 5 बजे तक वोटिंग समाप्त होने के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी ने 68.04 प्रतिशत टर्नआउट बताया, जो रात 8 बजे 68.12 प्रतिशत और रात 11.45 बजे 76.50 प्रतिशत कर दिया गया। अंतिम आंकड़ा चार दिन बाद 81.79 प्रतिशत जारी किया गया। भूषण ने फॉर्म 17सी के पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बूथ पर डाले गए वोटों का डेटा मशीन-पठनीय रूप में उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे स्वतंत्र जाँच मुश्किल हो गई। उन्होंने वीवीपेट पर्चियों की अनिवार्य गिनती और रियल-टाइम बूथ-स्तरीय डेटा की मांग की। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने फॉर्म 17सी और फॉर्म 20 का ऑडिट कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पूछा कि यदि बूथ स्तर पर फॉर्म 17सी पर हस्ताक्षर और मुहर लगी है, तब अंतिम डेटा में विसंगतियां क्यों दिखाई देती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मतदान प्रतिशत उसी दिन सार्वजनिक किया जाए और बूथ-स्तरीय सारांश तुरंत जारी किया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि पारदर्शिता की कमी लोकतंत्र के लिए खतरा है। डेटा में असामान्य पैटर्न और आधी रात के बाद अचानक वोटिंग की तेज़ी जैसी घटनाएं गंभीर जांच की मांग करती हैं। चुनाव आयोग को इन मुद्दों पर स्पष्टता और ऑडिट के माध्यम से भरोसा बहाल करना आवश्यक है, ताकि मतदाता और लोकतंत्र दोनों सुरक्षित रहें। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2026