नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख सैम पित्रोदा ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर भारत की भूमिका को लेकर आलोचना की है। उनका कहना है कि भारत ने इस महत्वपूर्ण संकट में “नैतिक श्रेष्ठता” नहीं दिखाई और वह “अमीर व ताकतवर हमलावरों” के साथ खड़ा दिखाई दिया। उनके अनुसार, भारत को अपने पारंपरिक मूल्यों सत्य, लोकतंत्र, विविधता और मानव सम्मान पर आधारित संतुलित रुख अपनाना चाहिए था। पाकिस्तान द्वारा खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करने के दावे पर कांग्रेस नेता पित्रोदा ने कहा कि किसी भी देश को शांति स्थापित करने का प्रयास करने का अधिकार है। उनका मानना है कि जितने अधिक पक्ष शांति प्रयासों में शामिल होंगे, उतना बेहतर होगा, क्योंकि ऐसे जटिल विवादों में यह निश्चित नहीं होता कि कौन-सा प्रयास सफल होगा। जब पित्रोदा से पूछा गया कि जवाहर लाल नेहरु और राहुल गांधी के दृष्टिकोण के बारे में, तब उन्होंने कहा कि राहुल गांधी “भारत के मूल विचार” के प्रतिनिधि हैं। यह विचार देश के संस्थापकों द्वारा स्थापित मूल्यों—सच्चाई, भरोसा, लोकतंत्र और सभी के प्रति सम्मान—पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रुख किसी विशेष देश जैसे अमेरिका, पाकिस्तान, इजरायल या ईरान के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वभौमिक मूल्यों के पक्ष में है। नक्सलवाद के मुद्दे पर पित्रोदा ने कहा कि वह संवाद में विश्वास रखते हैं, न कि बल प्रयोग में। उनका मानना है कि इस समस्या की जड़ों को समझना जरूरी है—लोगों ने हथियार क्यों उठाए, यह जानना महत्वपूर्ण है। हालांकि उन्होंने हिंसा का समर्थन नहीं किया, लेकिन कहा कि समाधान के लिए सभी पक्षों के दृष्टिकोण को समझना और सहानुभूति रखना आवश्यक है। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2026