-आरबीआई ने करेंसी में सट्टेबाजी पर अपनी कार्रवाई तेज की नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय रुपया 12 साल में गुरुवार को सबसे बड़ी बढ़त के साथ मजबूत हुआ। इसकी मुख्य वजह यह रही कि बैंकों की स्थानीय मुद्रा स्थितियों पर सीमाएं सख्त करने के कुछ दिनों बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने ऑफशोर डेरिवेटिव मार्केट पर प्रतिबंधों का विस्तार करके करेंसी में सट्टेबाजी पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी। तीन दिन की छुट्टी के बाद कारोबार शुरू होने पर रुपया डॉलर के मुकाबले 1.7 फीसदी तक मजबूत होकर 93.25 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद सबसे बड़ी तेजी है। यह तेजी ऐसे समय आई है जब एशियाई देशों की ज्यादातर मुद्राएं कमजोर बनी हुई थीं। इसी बीच ट्रंप ने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के संकेत दिए, जिससे वैश्विक बाजारों में दबाव बना रहा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड 5.24 फीसदी बढ़कर 106.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड 4.5 फीसदी चढ़कर 104.64 डॉलर प्रति बैरल हो गया। एशियाई शेयर बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। निक्केई, हैंग सेंग और कोस्पी में 3 फीसदी तक की गिरावट आई। घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत भी कमजोर रही, जहां सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में 2 फीसदी तक गिर गए। मुद्रा बाजार सोमवार से बंद थे। 31 मार्च को महावीर जयंती, 1 अप्रैल को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के कारण मुंद्रा बाजार बंद रहे और 3 अप्रैल को भी गुड फ्राइडे के कारण बाजार बंद रहेंगे। आरबीआई ने बैंकों को रुपए से जुड़े नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स ऑफर करने से रोक दिया है। साथ ही, कंपनियों को कैंसिल किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक करने की अनुमति भी नहीं दी है। इससे पहले आरबीआई ने बैंकों की नेट ओपन रुपए पोजिशन पर 100 मिलियन डॉलर की सीमा तय की थी। इसके अलावा बैंकों को अपने संबंधित पक्षों के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट करने से भी मना किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास 700 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो सट्टेबाजी को रोकने और जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर रुपए को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त है। सिराज/ईएमएस 02अप्रैल26