राष्ट्रीय
02-Apr-2026
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-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के निर्माण में सिविल सेवा का नया प्रतिमान स्थापित करेगा नई दिल्ली (ईएमएस)। बदलते वैश्विक परिदृश्य, तीव्र तकनीकी विकास और नागरिक अपेक्षाओं के विस्तार के इस दौर में शासन की प्रकृति भी तेजी से परिवर्तित हो रही है।ऐसे समय में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत प्रारंभ ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था के व्यापक रूपांतरण का सशक्त संकेत है। यह पहल “नागरिक देवो भव” की भावना को केंद्र में रखते हुए सेवा, संवेदना और दक्षता के नए मानक स्थापित करती है—जो सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के स्वप्न से जुड़ी हुई है।नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित यह सप्ताह मिशन कर्मयोगी के पाँच वर्ष पूर्ण होने का भी प्रतीक है।यह वह पड़ाव है जहाँ उपलब्धियों का मूल्यांकन करते हुए भविष्य की दिशा तय की जा रही है।इस पहल का उद्देश्य केवल कौशल विकास नहीं, बल्कि एक ऐसी सिविल सेवा का निर्माण करना है,जो सक्षम, उत्तरदायी,पारदर्शी और पूर्णतः नागरिक-केंद्रित हो।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित “विकसित भारत 2047” केवल आर्थिक प्रगति का लक्ष्य नहीं, बल्कि एक समग्र राष्ट्रीय दृष्टि है।यह एक ऐसे भारत की कल्पना करता है जो आत्मनिर्भर,समावेशी, तकनीकी रूप से अग्रणी और सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण हो। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि शासन व्यवस्था भी उसी अनुरूप विकसित हो - जहाँ निर्णय त्वरित हों, सेवाएँ सुलभ हों और नागरिकों का विश्वास सर्वोपरि हो।इसी संदर्भ में प्रधान मंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा का यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है कि भविष्य की सिविल सेवा के लिए “निरंतर सीखना” अनिवार्य है।अब प्रशिक्षण एक बार का औपचारिक चरण नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया बन चुका है-जहाँ अधिकारी “कहीं भी,कभी भी” सीख सकते हैं। iGOT जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म इस परिवर्तन को गति दे रहे हैं,जो लाखों कर्मियों को ज्ञान और कौशल से जोड़ रहे हैं।डॉ. मिश्रा ने शासन के नियम- आधारित ढाँचे से भूमिका-आधारित मॉडल की ओर संक्रमण को भी रेखांकित किया।यह बदलाव विकसित भारत की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रशासन को अधिक लचीला,परिणामोन्मुख और नवाचार-प्रधान बनाता है। अब अधिकारी केवल नियमों के पालनकर्ता नहीं, बल्कि परिवर्तन के वाहक और समाधान के निर्माता बन रहे हैं।क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने मिशन कर्मयोगी को ज्ञान,कौशल और मूल्यों के समन्वय का मॉडल बताया। वास्तव में “कर्मयोगी” का अर्थ ही है-कर्तव्य को साधना के रूप में अपनाना। यही वह भावना है जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को वास्तविक धरातल पर उतार सकती है।कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह द्वारा प्रस्तुत आँकड़े इस मिशन की व्यापकता को स्पष्ट करते हैं - iGOT प्लेटफॉर्म पर करोड़ों पंजीकरण और पाठ्यक्रम पूर्ण होना इस बात का संकेत है कि सीखने की यह संस्कृति अब जमीनी स्तर तक पहुँच रही है।यहाँ यह समझना आवश्यक है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब शासन की “अंतिम मील डिलीवरी” मजबूत हो। योजनाएँ तभी सफल मानी जाएँगी जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।इसी उद्देश्य से ‘कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट’ और ‘कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम’ जैसी पहलें जमीनी स्तर के कर्मचारियों को सशक्त बना रही हैं।सुब्रमण्यम रामदोराई ने जिस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों में दक्षता पर बल दिया, वह इस बात का संकेत है कि भविष्य का प्रशासन डिजिटल और डेटा-आधारित होगा। इसके साथ ही मानवीय संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है।विकसित भारत केवल तकनीकी रूप से उन्नत नहीं,बल्कि मानवीय मूल्यों से समृद्ध भी होना चाहिए। कर्मयोगी साधना सप्ताह का “प्रौद्योगिकी, परंपरा और ठोस परिणाम” पर आधारित ढाँचा इस संतुलन को स्पष्ट करता है।यह आधुनिकता और परंपरा के समन्वय के माध्यम से स्थायी और प्रभावी शासन की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है। आज जब विश्व अनेक चुनौतियों -जलवायु परिवर्तन,वैश्विक अस्थिरता और तीव्र शहरीकरण का सामना कर रहा है,तब भारत का यह मॉडल एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।निरंतर सीखने, नवाचार और सेवा-भाव के आधार पर निर्मित यह सिविल सेवा न केवल देश के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक नई पहचान बना सकती है। अंततः यह कहा जा सकता है कि ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ केवल एक कार्यक्रम नहीं,बल्कि विकसित भारत 2047 की दिशा में एक सशक्त कदम है।यह पहल प्रशासनिक व्यवस्था में उस ऊर्जा और दृष्टि का संचार करती है, जो भारत को एक सक्षम,संवेदनशील और विश्व-स्तरीय राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।यदि इस मिशन की भावना को सही रूप में आत्मसात किया गया, तो भारत की सिविल सेवा न केवल दक्षता और पारदर्शिता का प्रतीक बनेगी,बल्कि मानवीय संवेदना और सेवा-भाव का भी वैश्विक आदर्श प्रस्तुत करेगी,ऐसे में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के निर्माण में सिविल सेवा का नया प्रतिमान स्थापित करेगा । विनोद कुमार सिंह/ईएमएस/02/04/2026