02-Apr-2026
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रायपुर(ईएमएस)। छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में 23 साल बाद एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस की बेंच) ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को तीन सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। बात दे कि 4 जून 2003 को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता और कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय यह घटना पूरे राज्य में सनसनी का विषय बन गई थी। जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे और राजनीति के साथ-साथ कारोबार से भी जुड़े हुए थे। हत्या के मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अमित जोगी को उस समय सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। रामावतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, जहां से इसे पुनः सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया गया। अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का स्पष्ट आदेश जारी किया है। यह फैसला अमित जोगी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब अमित जोगी को तीन हफ्तों के अंदर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करना होगा। इस मामले में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी समेत कई अन्य आरोपियों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है और उन्हें उम्रकैद की सजा हो चुकी है। रामावतार जग्गी मूल रूप से कारोबारी थे। जब विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में आए, तब जग्गी भी उनके साथ पार्टी में शामिल हो गए और छत्तीसगढ़ में एनसीपी के कोषाध्यक्ष बने। उनकी हत्या ने उस समय राज्य की राजनीति को काफी प्रभावित किया था। हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश से अब मामले में नया कानूनी मोड़ आ गया है और आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सत्यप्रकाश(ईएमएस)02 अप्रैल 2026