02-Apr-2026
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रायपुर(ईएसएम)। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मामले से जुड़े 59 आरोपियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां सभी की मौजूदगी में सुनवाई पूरी हुई। अदालत ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने धारा 88 के तहत आरोपियों के बयान दर्ज किए। इस दौरान पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा भी पेश हुए। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल, सौम्या चौरसिया, निरंजन दास सहित आबकारी विभाग से जुड़े कई अधिकारी भी अदालत में मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, अदालत इस मामले में जल्द ही अपना निर्णय सुना सकती है। हाई-प्रोफाइल केस होने के कारण इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। ईडी ने एसीबी में दर्ज एफआईआर के आधार पर 3200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का जिक्र किया है। एजेंसी का आरोप है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में एक सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। जांच में जिन प्रमुख नामों का उल्लेख है, उनमें आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, घोटाले को A, B और C—तीन श्रेणियों में संचालित किया गया। डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपये तक कमीशन वसूले जाने का आरोप है। ओवरबिलिंग और टेंडर प्रक्रिया के जरिए कीमतों में वृद्धि कर लागत समायोजन किया गया। अतिरिक्त शराब का उत्पादन कर नकली होलोग्राम के जरिए सरकारी दुकानों में बिक्री कराई गई। जांच में यह भी सामने आया है कि होलोग्राम सप्लाई, बोतलों की आपूर्ति और परिवहन के लिए अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि प्रदेश के 15 जिलों को शराब खपाने के लिए चिन्हित किया गया था और दुकानदारों को बिक्री का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में दर्ज नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। एसीबी की जांच में 40 लाख पेटी से अधिक शराब की बिक्री के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। वहीं ईओडब्ल्यू की जांच में तीन वित्तीय वर्षों के दौरान 52 करोड़ रुपये ‘पार्ट C’ के रूप में सिंडिकेट को दिए जाने की बात सामने आई है। सत्यप्रकाश(ईएमएस)02 अप्रैल 2026