लेख
03-Apr-2026
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अमेरिका- इज़राइल और ईरान युद्ध युद्ध जिस पर दुनिया भर के मीडिया का ध्यान है। सारे चैनल युद्ध पर और खबर जो दिखाई जा रही है उससे शांति नष्ट हो गई है — युद्ध ने इंसानियत के मतलब पर हज़ारों बातचीत शुरू कर दी होती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मीडिया ने इसे नज़रअंदाज़ करना चुना, जिससे हमें हैरानी हुई कि क्या हमने अपने आस-पास एक अंधा और असंवेदनशील सोशल बबल बना लिया है। ईरान पर अमेरिका-इज़राइल की बमबारी में एक महीने से ज़्यादा समय से, ईरान के शहर मिनाब में 170 से ज़्यादा लड़कियों और टीचरों के अलावा, कई लोग मारे गए हैं। तेहरान ने मरी हुई लड़कियों की फ़ोटो जारी की हैं। उनके दुखी माता-पिता के वीडियो और फ़ोटो मीडिया और सोशल मीडिया पर शेयर किए गए, लेकिन हममें से कितने लोगों ने उन्हें देखने की परवाह की, ईरान पर अमेरिका-इज़राइल की बमबारी में एक महीने से ज़्यादा समय से, ईरान के शहर मिनाब में 170 से ज़्यादा लड़कियों और टीचरों के अलावा, कई लोग मारे गए हैं। 24 मार्च को, दर्जनों औरतें रोम की सड़कों पर हाथ में हाथ डाले, नंगे पैर मार्च कर रही थीं। ये गाज़ा और इज़राइल की माँएँ थीं। उनके बच्चे या रिश्तेदार हमास की हिंसा और इज़राइल द्वारा लिए गए बदले के शिकार हुए थे। उनका मैसेज ज़ोरदार और साफ़ था: इज़राइल और गाज़ा दोनों के रहने वाले खुद को आदम और हव्वा की औलाद मानते हैं, और उन्हें बस शांति चाहिए। यह मार्च उन लोगों के लिए एक सबक था जो सोचते हैं कि हर इज़राइली गाज़ा को जला देना चाहता है। ये औरतें 25 मार्च को पोप लियो XIV से मिलीं। पोप पहले ही शांति की अपील कर चुके थे। लेकिन क्या उन्होंने इन मांओं के कहने पर अमेरिका या यूरोप से बात की? तब से उनके रिएक्शन की कोई खबर नहीं है। इस युद्ध मेंअमेरिकी सेना, उपकरण और मध्य देश में बेस भी में खो देता हैऔर फिर कहा कि मैं असलऔर ट्रम्प ने देश से कहा युद्ध मेंअमेरिकी जीत गया हैलेकिन वास्तव में, कोई नहीं जीता है,ईरान देश को अब शांति से आपसी तालमेल से इसे खत्म करना चाहिएक्योंकि अमेरिका का युद्ध का इतिहास दूसरे विश्व युद्ध में 1945में अंत में हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम गिराने तक का है।द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में, 6 और 9 अगस्त 1945 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर दो परमाणु बम गिराए। इन हवाई बमबारी में 150,000 से 246,000 लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश नागरिक थे। ये परमाणु हथियारों का सशस्त्र संघर्ष में पहला और एकमात्र प्रयोग था। हम बौनों के ज़माने में जी रहे हैं, लीडर्स के नहीं। वर्ल्ड वॉर II से पहले और उसके ठीक बाद दुनिया ने महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला जैसे बड़े लोगों को देखा, जिनके कामों, अपीलों और दलीलों का बहुत वज़न था और दुनिया भर में उनकी गूंज सुनाई दी। उन्होंने अपनी जागृति से दुनिया को जगाए रखा और ज़िंदा रखा। उनसे प्रेरित होकर, आम लोगों ने अन्याय के खिलाफ़ मिलकर आवाज़ उठाई। 8 जून, 1972 की बात है। वियतनाम के ट्रांग बांग इलाके में बच्चे अमेरिका के सपोर्ट वाले हमलों से बचने के लिए अपनी सुरक्षा के लिए भाग रहे थे। नौ साल की किम फुक, वियतनाम में युद्ध से हुए भयानक हालात का उदाहरण बन गई, जब उसकी पीठ पर नेपाम के हमले में जलने के बाद, वह बिल्कुल नंगी दौड़ती हुई मारी गई। युद्ध का परिणाम हमेशा विनाशकारी होता है, जिसमें जान-माल की भारी हानि, आर्थिक मंदी, बुनियादी ढांचे का विनाश और गहरा मानवीय संकट शामिल है। यह न केवल देशों की सीमाओं को बदलता है और राजनीतिक स्थिरता को बाधित करता है, बल्कि पीढ़ियों तक मनोवैज्ञानिक आघात और सामाजिक उथल-पुथल भी छोड़ता है। युद्ध के प्रमुख परिणामों को इन बिंदुओं में समझा जा सकता है: जन-धन की हानि: युद्ध में सैनिकों और नागरिकों की भारी मृत्यु होती है, साथ ही संपत्ति, घरों और शहरों का विनाश होता है। आर्थिक मंदी और संकट: युद्धों के कारण व्यापार बाधित होता है, मुद्रास्फीति (महंगाई) बढ़ती है और देशों पर भारी कर्ज का बोझ पड़ता है। ऊर्जा और भोजन की आपूर्ति श्रृंखला टूट जाती है। राजनीतिक और भौगोलिक परिवर्तन: युद्ध के परिणामस्वरूप सरकारें गिर सकती हैं, नए राष्ट्र बन सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय संबंध बदल जाते हैं (जैसे, प्रथम विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यों का अंत)। शरणार्थी और विस्थापन: युद्ध के कारण लाखों लोग बेघर हो जाते हैं और शरणार्थी बनकर दूसरे देशों में जाने को मजबूर होते हैं। दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक आघात: युद्ध न केवल शारीरिक घाव देता है, बल्कि सैनिकों और नागरिकों में पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं छोड़ जाता है। पर्यावरणीय क्षति: विस्फोटों और हथियारों के उपयोग से भूमि, जल और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। भगवान राम और रावण के युद्ध में भगवान राम का संदेश धर्म, न्याय और करुणा की स्थापना करना था, न कि केवल विनाश। उन्होंने रावण को सुधारने का अंतिम अवसर (शांति प्रस्ताव) दिया, जो दर्शाता है कि युद्ध अंतिम विकल्प होना चाहिए। उनका मुख्य संदेश अधर्म पर धर्म की विजय और युद्ध में भी मर्यादा व नीति का पालन करना था। युद्ध में भगवान राम के संदेश के मुख्य बिंदु: धर्म और न्याय की सर्वोच्चता: राम का युद्ध व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा के लिए था। शांति का प्रयास: उन्होंने अंगद को शांति प्रस्ताव के साथ भेजा, यह स्पष्ट करने के लिए कि युद्ध से पहले हर संभव समाधान तलाशा जाना चाहिए। मर्यादा और नैतिकता: युद्ध के दौरान भी, उन्होंने नियमों का पालन किया और पराजित या निहत्थे शत्रु पर प्रहार न करने जैसी मर्यादाओं का पालन किया। समावेशिता: उन्होंने वनवासियों, वानरों और सभी जातियों को साथ लेकर यह संदेश दिया कि न्यायपूर्ण उद्देश्य के लिए एकता आवश्यक है। शत्रु के प्रति सम्मान: रावण के वध के बाद, राम ने विभीषण से कहा कि शत्रु के मरणोपरांत बैर समाप्त हो जाता है और रावण को सम्मानजनक अंतिम संस्कार दिलाया। अहंकार का नाश: राम ने रावण के माध्यम से यह संदेश दिया कि अत्यधिक शक्ति और अहंकार ही विनाश का कारण बनते हैं। ईएमएस / 03 अप्रैल 26