वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन इसके खत्म होने को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं है। एक ओर युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि जंग जल्द खत्म होगी या अमेरिका पहले ही जीत चुका है। कमोबेश एक दर्जन बार उन्होंने इसतरह का दावा किया लेकिन फिर वह पलटी मार गए। असल में, यह जंग अब अपने शुरुआती अनुमान से आगे निकल चुकी है। ट्रंप प्रशासन ने शुरुआत में 4 से 5 हफ्तों में खत्म होने वाला ऑपरेशन बताया था, और फिलहाल यह पांचवें हफ्ते में भी जारी है। इस बीच अमेरिका करीब 50,000 सैनिक मिडिल ईस्ट में तैनात हो चुके है, जो इस बात का संकेत है कि हालात उतने आसान नहीं हैं जितना सार्वजनिक बयानों में दिख रहा है। व्हाइट हाउस की तरफ से भी मिलेजुले संकेत मिल रहे हैं। प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि ऑपरेशन अपने लक्ष्यों के काफी करीब है और मिशन जारी है। वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि सभी उद्देश्य तय समय से पहले या उसके आसपास पूरे हो सकते हैं। इन बयानों से यह जरूर संकेत मिलता है कि अमेरिका अभी पीछे हटने के मूड में नहीं है। 2 मार्च को, जब जंग शुरू हुए कुछ ही दिन हुए थे, ट्रंप ने पूरी तरह सफल ऑपरेशन बताया था। इसके बाद 9 मार्च को उन्होंने कहा कि हम कई मायनों में जीत चुके हैं, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि अभी पूरी जीत बाकी है। उसी दिन उन्होंने यह भी कहा कि जंग बहुत जल्द खत्म होगी। इसके बाद 11 मार्च को ट्रंप ने दावा किया कि जंग किसी भी समय खत्म हो सकती है क्योंकि अब निशाना बनाने के लिए ज्यादा कुछ बचा नहीं है। लेकिन कुछ ही देर बाद कहा कि हमें काम पूरा करना होगा। 12 और 13 मार्च को भी उन्होंने इसी तरह के बयान दिए-कभी जीत करीब बताई, तब कभी कहा कि यह सिर्फ समय की बात है। हद तब हो गई जब 24 मार्च को ट्रंप ने साफ तौर पर कह दिया कि हम यह जंग जीत चुके हैं। लेकिन अगले ही दिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ, तब अमेरिका ईरान के ऊर्जा और पानी के ढांचे को तबाह कर सकता है। 26 मार्च को उन्होंने कहा कि ईरान हार चुका है, लेकिन इसके बावजूद सैन्य कार्रवाई जारी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर काम कर रही है। एक तरफ यह घरेलू समर्थन बनाए रखने की कोशिश है, दूसरी तरफ ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है। लेकिन इसका एक साइड इफेक्ट यह भी है कि इससे जंग को लेकर अनिश्चितता और बढ़ जाती है। आशीष/ईएमएस 03 अप्रैल 2026