ज़रा हटके
03-Apr-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। 1960 के दशक में अमेरिका द्वारा वियतनाम वार के दौरान इस्तेमाल किया गया रासायनिक हथियार एजेंट ऑरेंज आज भी मानवता के खिलाफ सबसे क्रूर प्रयोगों में गिना जाता है। अमेरिका ने वियतनाम में अपनी सैन्य रणनीति के तहत इस खतरनाक रसायन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। इसके दूरगामी परिणाम इतने भयावह रहे कि दशकों बाद भी वियतनाम इसकी कीमत चुका रहा है। 1961 से 1971 के बीच ‘ऑपरेशन रैंच हैंड’ के तहत अमेरिकी वायुसेना ने वियतनाम के विशाल इलाकों पर एजेंट ऑरेंज का छिड़काव किया। यह रसायन मुख्य रूप से 2,4-डी और 2,4,5-टी नामक केमिकल्स का मिश्रण था, लेकिन इसके निर्माण के दौरान इसमें टीसीडीडी नामक अत्यंत विषैला डाइऑक्सिन मिल गया, जो लंबे समय तक पर्यावरण और मानव शरीर में बना रहता है। यह पानी में आसानी से नहीं घुलता, बल्कि मिट्टी और जीवित प्राणियों के वसा ऊतकों में जमा होकर धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों को जन्म देता है। इस रसायन के छिड़काव ने वियतनाम के पारिस्थितिकी तंत्र को गहरी चोट पहुंचाई। लाखों एकड़ उपजाऊ भूमि बंजर हो गई, घने जंगल सूख गए और जैव विविधता को भारी नुकसान हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 45 लाख एकड़ क्षेत्र में 1.9 करोड़ गैलन से अधिक एजेंट ऑरेंज का उपयोग किया गया। इसके चलते पेड़-पौधे नष्ट हो गए और कई इलाकों में खेती करना असंभव हो गया। मिट्टी में मौजूद डाइऑक्सिन आज भी कुछ क्षेत्रों को ‘हॉटस्पॉट’ बनाकर रखे हुए है, जहां रहना और खेती करना जोखिम भरा है। मानव स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव और भी भयावह रहा। एजेंट ऑरेंज के संपर्क में आने वाले लाखों लोगों में कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज, श्वसन रोग और अन्य गंभीर बीमारियां देखी गईं। सबसे चिंताजनक पहलू इसका टेराटोजेनिक प्रभाव है, जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशुओं का विकास प्रभावित हुआ। वियतनाम में आज भी हजारों बच्चे जन्मजात विकृतियों, मानसिक अक्षमता और शारीरिक अपंगता के साथ पैदा हो रहे हैं। कई परिवारों में यह असर तीसरी और चौथी पीढ़ी तक देखा जा रहा है। हो ची मिन्ह सिटी के वार मेमोरियल संग्रहालय में आज भी इस त्रासदी की झलक देखने को मिलती है, जहां तस्वीरें और दस्तावेज इस रासायनिक युद्ध के भयावह परिणामों को दर्शाते हैं। यह केवल एक युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ किए गए ऐसे प्रयोग की गवाही है, जिसने अनगिनत जिंदगियों को प्रभावित किया। हालांकि बीते वर्षों में अमेरिका और वियतनाम ने मिलकर कुछ प्रभावित क्षेत्रों को साफ करने के प्रयास किए हैं, लेकिन यह काम बेहद जटिल और समय लेने वाला है। कुछ हवाई अड्डों और हॉटस्पॉट्स को डाइऑक्सिन मुक्त करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, फिर भी पूरी तरह से इस जहर को खत्म करना संभव नहीं हो पाया है। एजेंट ऑरेंज का इतिहास यह साबित करता है कि युद्ध में इस्तेमाल किए गए रासायनिक हथियार केवल तत्काल नुकसान ही नहीं पहुंचाते, बल्कि उनका असर पीढ़ियों तक बना रहता है। सुदामा/ईएमएस 03 अप्रैल 2026