ज़रा हटके
03-Apr-2026
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बीजिंग (ईएमएस)। चीन में लोग पारंपरिक कब्रिस्तान की जगह खाली पड़े फ्लैट्स को ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ में बदल रहे थे, जहां वे अपने पूर्वजों की राख और अस्थियां सुरक्षित रख रहे थे। इस प्रथा हाल ही में चाइनीज सरकार ने सख्त रोक लगा दी है। इस रोक को लेकर देशभर में हलचल मच गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई रिहायशी इलाकों में ऐसे फ्लैट्स पाए गए जहां कोई जीवित व्यक्ति नहीं रहता, बल्कि कमरों में मोमबत्तियां जलती रहती हैं और मृतकों की तस्वीरों के सामने राख के कलश रखे होते हैं। इन फ्लैट्स की खिड़कियां अक्सर बंद रहती हैं और अंदर का माहौल बेहद डरावना दिखाई देता है। पड़ोसियों के अनुसार, यह किसी हॉरर फिल्म जैसा दृश्य लगता है, लेकिन यह हकीकत बन चुका है। इस ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ी वजह चीन में अंतिम संस्कार की बढ़ती लागत है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में वहां एक सामान्य अंतिम संस्कार का खर्च औसत वार्षिक आय के लगभग आधे के बराबर था। दूसरी ओर, रियल एस्टेट सेक्टर में आई गिरावट के चलते शहरों से दूर बने फ्लैट्स काफी सस्ते हो गए हैं। ऐसे में लोगों ने कब्रिस्तान में महंगी जगह खरीदने के बजाय सस्ते फ्लैट खरीदकर उन्हें ‘अंतिम विश्राम स्थल’ के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि रिहायशी संपत्तियों का उपयोग मानव अवशेष रखने के लिए नहीं किया जा सकता। नए नियमों के तहत अब केवल अधिकृत कब्रिस्तानों में ही अस्थियां या राख रखी जा सकेगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम शहरी व्यवस्था बनाए रखने और सामाजिक मानकों को संरक्षित करने के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के पीछे जनसंख्या से जुड़े बदलाव भी एक अहम कारण हैं। चीन में जन्म दर लगातार घट रही है, जबकि बुजुर्ग आबादी बढ़ने से मृत्यु दर में इजाफा हो रहा है। इससे कब्रिस्तानों की मांग तेजी से बढ़ी है और कीमतें आसमान छूने लगी हैं। इसके अलावा अंतिम संस्कार सेवाओं में पारदर्शिता की कमी और धोखाधड़ी के मामलों ने भी आम लोगों की परेशानी बढ़ाई है। नए नियम लागू होने के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन ‘बोन ऐश अपार्टमेंट्स’ को बंद कराना और लोगों को वैकल्पिक समाधान देना होगा। सुदामा/ईएमएस 03 अप्रैल 2026