03-Apr-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोहराम मचा दिया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही ठप होने से दुनिया के कई देशों में तेल और गैस का संकट गहरा गया है। मार्च 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस की ओर मजबूती से कदम बढ़ाए हैं। फरवरी की तुलना में मार्च में रूसी कच्चे तेल के आयात में 90 फीसदी की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह उछाल ऐसे समय में आया है जब होर्मुज संकट के कारण मध्य पूर्व के देशों से भारत का कुल आयात करीब 15 फीसदी तक गिर गया है। भारत भी इससे अछूता नहीं है, जहाँ एलपीजी और एलएनजी की किल्लत ने आम जनजीवन और उद्योगों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। हालांकि, इस भीषण संकट के बीच भारत के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। भारत ने अपने पुराने और भरोसेमंद मित्र रूस के साथ तेल व्यापार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य केंद्र है और इसकी नाकेबंदी ने भारत की रसोई गैस और प्राकृतिक गैस आपूर्ति शृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च में भारत के एलपीजी आयात में 40 फीसदी की कमी आई है, क्योंकि भारत अपनी 90 फीसदी एलपीजी इसी समुद्री मार्ग से मंगवाता है। सबसे चौंकाने वाली गिरावट कतर से होने वाली एलएनजी आपूर्ति में देखी गई, जो 92 फीसदी तक गिर गई है। इसका मुख्य कारण कतर-एनर्जी द्वारा घोषित फोर्स मेज्योर और समुद्री मार्ग का बंद होना है। देश के 33.2 करोड़ से अधिक रसोई गैस ग्राहकों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। फिलहाल व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस की आपूर्ति सीमित कर दी गई है और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। भारत के लिए रूस से यह व्यापारिक बढ़त संभव हो पाई अमेरिका द्वारा घोषित 30 दिनों की विशेष छूट से। फरवरी तक रूस से खरीद काफी कम थी, लेकिन इस छूट के तहत समुद्र में मौजूद रूसी तेल टैंकरों को खरीदने की अनुमति मिलते ही भारत ने इसका भरपूर लाभ उठाया। साथ ही, भारत अब विकल्प के तौर पर अंगोला, गैबॉन और कांगो जैसे देशों से भी तेल मंगवा रहा है। सऊदी अरब और यूएई की पाइपलाइनें, जो होर्मुज को बायपास करती हैं, भारत के लिए लाइफलाइन साबित हो रही हैं। आने वाले दिनों में वेनेजुएला और ईरान से भी तेल आयात की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, ताकि भविष्य के जोखिमों को कम किया जा सके। वीरेंद्र/ईएमएस/03अप्रैल2026