मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई में अनधिकृत निर्माण के मुद्दे पर अब महानगरपालिका के प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो गई है। अगर कोई नगरसेवक अनधिकृत निर्माण करता है या उस पर कार्रवाई में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जो अधिकारी इन अनधिकृत निर्माणों को संरक्षण देते हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? दरअसल मुंबई महानगरपालिका की स्थायी समिति की बैठक में शिवसेना (उबाठा) के नगरसेवक यशोधर फणसे ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि शहर में तेजी से बढ़ रहे अनधिकृत निर्माण एक गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं और इससे जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। फणसे ने सवाल किया कि अनधिकृत निर्माण के मामले में जो नियम नगरसेवकों पर लागू होते हैं, क्या वही नियम अधिकारियों पर भी लागू होते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कोई नगरसेवक अनधिकृत निर्माण की शिकायत करता है, तो महापालिका के अधिकारी संबंधित लोगों को शिकायतकर्ता का नाम बता देते हैं, जिससे वे सीधे नगरसेवक के घर पहुंच जाते हैं। उन्होंने वर्सोवा इलाके का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़े पैमाने पर अनधिकृत निर्माण हुए हैं और उन्हें पानी की कनेक्शन जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। ऐसे में इन सबके लिए जिम्मेदार कौन है, यह सवाल उठना स्वाभाविक है। इस मुद्दे पर महापालिका सभागृह नेता गणेश खणकर ने भी इसे गंभीर बताते हुए कहा कि दहिसर, मालाड-मालवणी और कुर्ला जैसे कई इलाकों में अनधिकृत निर्माण बिना अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वळणाई नाले के किनारे भी बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ है। खणकर ने मांग की कि जो अधिकारी अनधिकृत निर्माण को संरक्षण देते हैं, उनकी ग्रेच्युटी और पेंशन रोक दी जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी नगरसेवक या उसके रिश्तेदार के नाम पर अनधिकृत निर्माण पाया जाता है, तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। ऐसे में यही नियम अधिकारियों पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की इस कार्यशैली के कारण नगरसेवकों की जान को खतरा पैदा हो रहा है और ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ अधिकारी लाभार्थी नीति अपना रहे हैं। इसलिए आयुक्त को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। स्थायी समिति ने स्पष्ट किया कि यह एक गंभीर विषय है और इसमें शामिल सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। स्वेता/संतोष झा-०३ अप्रैल/२०२६/ईएमएस