दुबई,(ईएमएस)। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने फ्रांस के साथ मिलकर राफेल एफ5 लड़ाकू विमान की फंडिग के फैसले से कदम पीछे खींचे हैं। इसके बाद फ्रांस को अपने अगली पीढ़ी के राफेल एफ5 फाइटर जेट बनाने के लिए अपने दम पर खर्च करना होगा। इससे फ्रांस पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और खाड़ी देशों में राफेल बेचने की उसकी कोशिश पर असर होगा। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की भी नजर होगी। भारत राफेल का इस्तेमाल कर रहा है और 100 से ज्यादा राफेल खरीदने की डील फ्रांस से की है। फ्रांसीसी अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने फ्रांस के साथ मिलकर राफेल की फंडिंग के प्रस्तावित समझौते से हाथ खींच लिया है। फ्रांस ने इस उन्नत लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए यूएई से आर्थिक मदद मांगी थी। इस प्रोग्राम की अनुमानित लागत 5 अरब यूरो (5.7 अरब डॉलर) है। इसमें से फ्रांस को आधे से ज्यादा यानी 3.5 अरब यूरो (4.03 अरब डॉलर) यूएई से मिलने थे। रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई और फ्रांस के बीच सौदे पर चल रही बातचीत बीते साल के आखिर में ही टूट गई। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आबूधाबी यात्रा के दौरान दोनों पक्षों के बीच तनाव पैदा हुआ और इसके परिणामस्वरूप चीजें पटरी से उतर गईं। यूएई ने समझौते से अलग होने का फैसला लिया। फ्रांसिसी रक्षा मंत्रालय अब राफेल एफ5 कार्यक्रम का पूरा खर्च खुद उठाएगा। यह खर्च एक नए सैन्य प्रोग्रामिंग कानून के तहत किया जाएगा, जिसकी समीक्षा अप्रैल की शुरुआत में मंत्रियों की परिषद द्वारा किए जाने की उम्मीद है। यूएई से मिलने वाली फंडिंग के रुकने से फ्रांस के रक्षा बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। फ्रांस के रक्षा बजट पर होने वाले असर से एफ-5 मानक से जुड़े अपग्रेड और विमानों की डिलीवरी में देरी हो सकती है। भारत को राफेल की आपूर्ति पर भी इससे असर होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह सामने नहीं आया है कि इससे भारत को मिलने वाले राफेल पर असर होगा। राफेल एफ 5 को फ्रांस के प्रमुख लड़ाकू विमान के एक बड़े अपग्रेड के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें ऐसी उन्नत तकनीकें शामिल की गई हैं, जो तेजी से जटिल और तीव्र संघर्ष वाले माहौल में विमान की युद्धक क्षमताओं को और अधिक बढ़ा देंगी। इससे फ्रांस का यह विमान दुनिया के सबसे ताकतवर जेट में शामिल हो जाएगा। आशीष दुबे / 03 अप्रैल 2026