लेख
04-Apr-2026
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असम की राजनीति इन दिनों एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है जहाँ विकास, सुशासन और स्थिरता चुनावी विमर्श के केंद्र में आ गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया दौरे और जनसभाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी और एनडीए इस बार भी राज्य में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। उनके भाषणों में न केवल आत्मविश्वास झलकता है बल्कि पिछले वर्षों में किए गए कार्यों का ठोस आधार भी दिखाई देता है। इसी कड़ी में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की कार्यशैली और प्रशासनिक दक्षता ने राज्य की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बीते एक दशक में असम ने जिस तरह से परिवर्तन का अनुभव किया है वह अभूतपूर्व कहा जा सकता है। एक समय था जब राज्य की पहचान अशांति, उग्रवाद और पिछड़ेपन से जुड़ी होती थी लेकिन आज वही असम विकास, निवेश और स्थिरता के नए मॉडल के रूप में उभर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में जिस “चाय और चिप” की पहचान की बात कही वह केवल एक नारा नहीं बल्कि भविष्य की स्पष्ट दिशा का संकेत है। असम जो कभी केवल चाय उत्पादन के लिए जाना जाता था अब सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी जगह बनाने की ओर बढ़ रहा है। यह परिवर्तन बताता है कि सरकार की सोच केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है बल्कि आने वाले दशकों को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाई जा रही हैं। कानून व्यवस्था के क्षेत्र में हुए सुधार इस बदलाव की सबसे मजबूत नींव हैं। एक समय था जब असम में बंद, कर्फ्यू और हिंसा आम बात थी। निवेशक राज्य में आने से कतराते थे और आम नागरिक असुरक्षा के माहौल में जीवन जीने को मजबूर था। लेकिन डबल इंजन सरकार के आने के बाद हालात तेजी से बदले हैं। उग्रवाद पर कड़ा प्रहार किया गया और हजारों युवाओं को मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिला। आज असम में शांति का वातावरण है और यही शांति विकास की सबसे बड़ी शर्त है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन को सक्रिय और जवाबदेह बनाया है जिससे जनता में विश्वास बढ़ा है। विकास की बात करें तो बुनियादी ढांचे में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। सड़कों का जाल तेजी से फैलाया गया है और ऐसे हाईवे तैयार किए गए हैं जिन पर आपातकालीन स्थिति में लड़ाकू विमान तक उतर सकते हैं। यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। ब्रह्मपुत्र नदी पर नए पुलों का निर्माण और अंडर टनल परियोजना से राज्य के विभिन्न हिस्सों के बीच दूरी कम हो रही है जिससे व्यापार और आवागमन दोनों को गति मिली है। यह वही असम है जहाँ कभी एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचना कठिन माना जाता था। गरीब कल्याण योजनाओं के प्रभाव ने भी सरकार की लोकप्रियता को बढ़ाया है। लाखों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए चलाई गई योजनाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। लखपति दीदी अभियान के माध्यम से हजारों महिलाएं आज अपनी आय बढ़ाने में सफल हुई हैं। यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक भी है क्योंकि इससे महिलाओं की स्थिति मजबूत हुई है और उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। जहाँ पहले मेडिकल कॉलेजों की संख्या बहुत सीमित थी वहीं अब नए कॉलेजों का निर्माण और पुराने संस्थानों का विस्तार किया गया है। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है बल्कि युवाओं के लिए शिक्षा के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। इसी तरह स्कूल शिक्षा को मजबूत करने के लिए कई नई योजनाएं लागू की गई हैं ताकि आने वाली पीढ़ी बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सके। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और मुख्यमंत्री सरमा के क्रियान्वयन के बीच जो तालमेल देखने को मिलता है वह इस सरकार की सबसे बड़ी ताकत है। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय ने विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने में तेजी लाई है। यही कारण है कि असम में डबल इंजन सरकार का मॉडल सफल होता नजर आ रहा है। यह मॉडल केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं है बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी समान रूप से ध्यान देता है। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो भाजपा और एनडीए की हैट्रिक की संभावना इसी मजबूत प्रदर्शन पर आधारित है। जनता ने पिछले वर्षों में बदलाव को महसूस किया है और यही अनुभव चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता है। प्रधानमंत्री मोदी का करिश्माई नेतृत्व और मुख्यमंत्री सरमा की सक्रियता मिलकर एक ऐसी राजनीतिक ताकत बनाते हैं जो विपक्ष के लिए चुनौती बन गई है। कांग्रेस पर लगाए गए आरोप और उसके पुराने शासन की यादें भी भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने में मदद करती हैं। असम में पहचान की राजनीति से ऊपर उठकर विकास की राजनीति को स्थापित करना इस सरकार की बड़ी उपलब्धि है। आज राज्य में निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। चाय उद्योग के साथ साथ नए सेक्टर में विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। इससे युवाओं को राज्य में ही भविष्य बनाने का अवसर मिल रहा है जो पहले संभव नहीं था। आने वाले चुनावों में यह सभी कारक मिलकर भाजपा को मजबूत स्थिति में खड़ा करते हैं। जनता के बीच सरकार के कामकाज को लेकर सकारात्मक भावना है और यही भावना चुनाव परिणामों में परिलक्षित हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी का यह विश्वास कि असम में हैट्रिक तय है केवल राजनीतिक बयान नहीं बल्कि जमीनी हकीकत पर आधारित आकलन प्रतीत होता है। अंततः यह कहा जा सकता है कि असम आज एक परिवर्तनशील राज्य के रूप में उभर रहा है जहाँ विकास और सुशासन की नई कहानी लिखी जा रही है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और हिमंत बिस्वा सरमा की कार्यकुशलता ने मिलकर इस परिवर्तन को संभव बनाया है। यदि यही गति बनी रहती है तो असम न केवल पूर्वोत्तर का बल्कि पूरे देश का एक प्रमुख विकास मॉडल बन सकता है और यही विश्वास भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की ओर अग्रसर करता है। (L 103 जलवन्त टाऊनशिप पूणा बॉम्बे मार्केट रॉड4,नियर नन्दालय हवेली सूरत गुजरात मो 99749 40324 वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार स्तम्भकार) ईएमएस / 04 अप्रैल 26